काठमांडू। डिजिटल डेस्क
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर एक विशाल काले पत्थर की तस्वीर और वीडियो वायरल हो रहे हैं। पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि बाढ़ और तेज बहाव के बाद मुक्तिनाथ के पास 31 टन वजनी विशाल शालिग्राम सामने आया है। पत्थर की सतह पर गोलाकार आकृतियां भी दिखाई दे रही हैं। हालांकि, पड़ताल में वायरल तस्वीर से जुड़ा दावा भ्रामक पाया गया है।
क्या बाढ़ के बाद मिला 31 टन का शालिग्राम
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि नेपाल में हालिया बाढ़ के बाद मुक्तिनाथ क्षेत्र में नदी के तेज बहाव से विशाल शालिग्राम बाहर आया है। इसे 31 टन वजनी और प्राकृतिक शालिग्राम बताया जा रहा है।
पड़ताल में इस दावे की पुष्टि नहीं हुई। उपलब्ध फैक्ट-चेक रिपोर्टों के मुताबिक वायरल तस्वीर में दिखाई दे रही वस्तु हाल की बाढ़ के बाद सामने आया कोई नया प्राकृतिक शालिग्राम नहीं है।
वायरल तस्वीर में क्या दिखाई दे रहा है
फैक्ट-चेक रिपोर्टों के अनुसार वायरल तस्वीर में दिखाई दे रही संरचना नेपाल के मुस्तांग जिले के जोमसोम में मौजूद करीब 22 फीट यानी 6.7 मीटर ऊंची शालिग्राम प्रतिकृति है। इसे पहले से तैयार किया गया था और हाल की बाढ़ के बाद खोजी गई प्राकृतिक शिला के तौर पर पेश किया जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक यह संरचना एक बड़े प्राकृतिक पत्थर को तराशकर तैयार की गई थी। इसका निर्माण जोमसोम क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के तहत किया गया था।
31 टन वजन की भी पुष्टि नहीं
वायरल पोस्ट में इस संरचना का वजन 31 टन बताया जा रहा है। फैक्ट-चेक रिपोर्टों के अनुसार 31 टन के वजन की कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए वायरल तस्वीर में दिखाई दे रही संरचना को 31 टन की प्राकृतिक शालिग्राम शिला बताने का आधार नहीं मिलता।
प्राकृतिक शालिग्राम पाए जाते हैं
नेपाल में शालिग्राम का धार्मिक और भौगोलिक महत्व है। काली गंडकी नदी क्षेत्र में प्राकृतिक शालिग्राम पाए जाते हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार काली गंडकी नदी के किनारे कागबेनी से रिडी तक शालिग्राम मिलने की परंपरा है। मुक्तिनाथ के उत्तर में स्थित दामोदर कुंड भी शालिग्राम से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है।
सेतिबेनी क्षेत्र में काली गंडकी और सेती नदियों के संगम के पास एक बड़े शालिग्राम का धार्मिक महत्व है। जुलाई 2026 में लगातार बारिश के दौरान काली गंडकी नदी का जलस्तर बढ़ने से यह शिला बाढ़ के पानी में डूब गई थी।
शालिग्राम पर दिखाई देती हैं गोलाकार आकृतियां
शालिग्राम शिलाओं पर प्राकृतिक रूप से गोलाकार और सर्पिल आकृतियां पाई जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन आकृतियों को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से जोड़ा जाता है।
भूवैज्ञानिक रूप से शालिग्राम को अमोनाइट जीवाश्मों से जोड़ा जाता है। इन जीवाश्मों की संरचना के कारण पत्थरों की सतह पर सर्पिल या गोलाकार आकृतियां दिखाई दे सकती हैं।
नेपाल में हालिया बाढ़ से तबाही
नेपाल में 26 अगस्त को आई फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। रिपोर्टों के अनुसार हिमालय में ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और मलबे का बड़ा प्रवाह नदी घाटी में पहुंचा, जिससे अचानक बाढ़ की स्थिति बनी।
इस बाढ़ में सड़क, पुल, घर और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है।