चार साल से बन रहा पुल अब भी अधूरा, बारिश में दलदल बनी सर्विस रोड से गुजर रहे ग्रामीण

बालाघाट। डिजिटल डेस्क

बालाघाट मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर लिंगा-हट्टा मार्ग पर छोटी घिसर्री नदी में बन रहा उच्चस्तरीय पुल करीब चार साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। बारिश के दौरान पुल के निर्माण के साथ बनाए गए सर्विस मार्ग पर मिट्टी और दलदल के कारण ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है।

लगातार बारिश से सर्विस मार्ग हुआ दलदल

छोटी घिसर्री नदी पर पुल निर्माण के चलते वाहनों के लिए बनाए गए सर्विस मार्ग पर लगातार बारिश का असर दिखाई दे रहा है। रिमझिम बारिश के बीच मार्ग पर पड़ी मिट्टी दलदल में बदल गई है। ऐसे में दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को फिसलन के बीच बमुश्किल आवाजाही करनी पड़ रही है।

बारिश के दौरान छोटे पुल पर पानी आने से आसपास के गांवों का सड़क संपर्क भी प्रभावित होता है। पानी उतरने के बाद सर्विस मार्ग पर जमा मिट्टी से फिसलन और बढ़ जाती है।

दर्जनभर गांवों को जोड़ता है मार्ग

लिंगा-हट्टा मार्ग आसपास के करीब दर्जनभर गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। पुल का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को वैकल्पिक सर्विस मार्ग से आवागमन करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन बारिश के दौरान आवाजाही की समस्या से राहत के लिए अब तक प्रभावी व्यवस्था नहीं हो सकी है।

2023 में शुरू हुआ था निर्माण

उपलब्ध जानकारी के अनुसार छोटी घिसर्री नदी पर उच्चस्तरीय पुल का निर्माण 30 सितंबर 2023 को शुरू किया गया था। करीब 150 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण की लागत लगभग 732.32 लाख रुपये बताई गई है।

निर्माण को 29 सितंबर 2025 तक पूरा करने की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं हो सका। बताया गया कि करीब एक साल तक निर्माण कार्य बंद रहने के बाद पुन: टेंडर प्रक्रिया के जरिए काम शुरू किया गया।

इसके बाद निर्माण को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यह समय सीमा भी निकल चुकी है।

अभी करीब 10 फीसदी काम बाकी

ग्रामीणों के अनुसार पुल का करीब 10 फीसदी काम अभी बाकी है। इसके अलावा पुल के आसपास सर्विस रोड का निर्माण भी पूरा किया जाना है। बारिश के मौसम में यही अधूरा संपर्क मार्ग ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि बारिश शुरू होने से पहले निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाता तो उन्हें कीचड़ और फिसलन के बीच जोखिम लेकर सफर नहीं करना पड़ता।

सिस्टम पर उठ रहे सवाल

करीब चार साल से चल रहे पुल निर्माण और तय समय सीमा के बाद भी काम पूरा नहीं होने से निर्माण की गति और विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि निर्माण पूरा होने तक बारिश के दौरान आसपास के गांवों के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा कैसे मिलेगी।

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