पन्ना। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश के पन्ना में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार को रिश्वत को लेकर दिए गए बयान के बाद निलंबित कर दिया गया है। राज्य शासन ने 30 अक्टूबर 2026 को निलंबन आदेश जारी किया। आदेश में उनके 28 अक्टूबर को मीडिया के सामने दिए गए वक्तव्य को मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का उल्लंघन माना गया है। यह मामला उस समय चर्चा में आया, जब विभाग के दो कर्मचारियों को लोकायुक्त ने 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। इसके बाद अहिरवार का रिश्वत को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ।
क्या कहा था कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार ने
मीडिया से बातचीत के दौरान सीबी अहिरवार ने रिश्वत को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
प्रकाशित समाचारों के मुताबिक, अहिरवार ने कहा था कि वह रिश्वत मांगते नहीं हैं, लेकिन कोई अपनी खुशी या प्यार से कुछ देता है तो उसे लेने से इनकार भी नहीं करते। उन्होंने अपने लिए किसी निश्चित प्रतिशत या कमीशन की बात से भी इनकार किया था।
इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। इसके बाद राज्य शासन ने उनके सार्वजनिक बयान और सरकारी सेवक के आचरण को आधार बनाकर निलंबन का आदेश जारी किया।
निलंबन आदेश में क्या कहा गया
मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग, मंत्रालय भोपाल की ओर से जारी आदेश में सीबी अहिरवार के वक्तव्य को कदाचरण की स्वीकारोक्ति माना गया है।
आदेश के अनुसार, उनका यह आचरण मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1)(एक) और 3(1)(तीन) का उल्लंघन है। शासन ने इसे सरकारी सेवक के अपेक्षित आचरण के विपरीत माना।
इसी आधार पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान सीबी अहिरवार का मुख्यालय भोपाल स्थित जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में निर्धारित किया गया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
45 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे विभाग के दो कर्मचारी
यह पूरा घटनाक्रम पन्ना के जल संसाधन विभाग में रिश्वत के एक मामले के बाद सामने आया। प्रकाशित समाचारों के अनुसार ग्वालियर के पंजीकृत ठेकेदार गौरव तोमर मझगांय मध्यम परियोजना की नहर में कैनाल स्लूस निर्माण का काम कर रहे थे। निर्माण कार्य से जुड़े अंतिम बिल के भुगतान के बदले रिश्वत मांगे जाने की शिकायत उन्होंने लोकायुक्त पुलिस सागर से की थी।
शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई की। इस दौरान विभाग के संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार और सहायक ग्रेड-2 अरविंद कुमार पाठक को रिश्वत की रकम लेते पकड़ा गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, दीपक सिंह परमार के पास से 15 हजार रुपये और अरविंद कुमार पाठक के पास से 30 हजार रुपये बरामद हुए। इस तरह कुल 45 हजार रुपये की राशि का मामला सामने आया।
सरकारी कर्मचारियों के आचरण पर फिर उठे सवाल
इस घटनाक्रम ने सरकारी विभागों में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर लोकायुक्त की कार्रवाई में विभाग के दो कर्मचारियों के रिश्वत लेते पकड़े जाने का मामला है, वहीं दूसरी ओर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का रिश्वत को लेकर दिया गया सार्वजनिक बयान चर्चा का विषय बना।
राज्य शासन ने अपने आदेश में सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। अब निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई से संबंधित जानकारी का इंतजार रहेगा।