PM स्वनिधि का अजीब मामला, लोन मिला नहीं और आया ₹25 हजार का मैसेज

सतना। डिजिटल डेस्क

प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत गरीब स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक मदद देने की व्यवस्था पर सतना में गंभीर सवाल उठे हैं। एक हितग्राही का दावा है कि उसके नाम से इंडियन बैंक की सोहावल शाखा से लोन से संबंधित मैसेज मोबाइल पर आए, जबकि उसका कहना है कि संबंधित शाखा में उसका बचत खाता तक नहीं है।

मामला तब और गंभीर हो गया, जब हितग्राही के मोबाइल पर पहले लोन की ट्रेंच बंद होने और ₹25 हजार की दूसरी ट्रेंच के लिए पात्र होने का मैसेज पहुंचा। हितग्राही का कहना है कि उसे पहली ट्रेंच की राशि मिली ही नहीं।

मामले की जानकारी लीड बैंक मैनेजर गौतम शर्मा तक पहुंची है। उन्होंने जांच कराने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि संबंधित बैंक की ओर से ऐसा मैसेज नहीं भेजा गया है तो आईपी एड्रेस का मिलान कराया जाएगा और जरूरत पड़ने पर पुलिस की साइबर सेल की मदद ली जाएगी।

बैंक में खाता नहीं, फिर लोन का मैसेज कैसे आया?

मामला सतना की परमेश्वरी नाम की हितग्राही से जुड़ा बताया जा रहा है। उनके मोबाइल पर इंडियन बैंक की ओर से एक संदेश आया। संदेश में बताया गया कि उनका पहला ट्रेंच का लोन बंद हो चुका है और वह ₹25 हजार की दूसरी ट्रेंच के लिए पात्र हो गई हैं।

परमेश्वरी का दावा है कि उन्होंने इंडियन बैंक की सोहावल शाखा से ऐसा कोई लोन लिया ही नहीं और वहां उनका बचत खाता भी नहीं है।

इसके बाद जब उन्होंने बैंक शाखा में जाकर जानकारी ली तो उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि वह पात्र नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यदि हितग्राही अपात्र थी तो उसके नाम पर लोन से संबंधित प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी और मोबाइल पर लोन बंद होने का संदेश किस आधार पर आया?

₹35 हजार के वितरण पर भी उठ रहे सवाल

मामले में एक और गंभीर सवाल ₹35 हजार की कथित राशि के वितरण को लेकर उठाया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि हितग्राही के नाम पर राशि स्वीकृत या वितरित दिखाई गई है, तो वह राशि आखिर किस खाते में गई?

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित रिकॉर्ड में वास्तव में राशि का वितरण हुआ है या केवल पोर्टल पर किसी स्तर की प्रविष्टि हुई है। इसका जवाब बैंक के रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच से ही सामने आएगा।

यही वजह है कि पूरे मामले में लोन स्वीकृति, वितरण, बैंक खाता और पोर्टल पर दर्ज विवरण का मिलान महत्वपूर्ण होगा।

पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों की जांच जरूरी

PM SVANidhi में आवेदन और ऋण प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होती है। इंडियन बैंक के वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन ‘उद्यमी मित्र’ पोर्टल के माध्यम से भेजे जाते हैं और ऋण की स्वीकृति तथा वितरण के बाद बैंक शाखा को ऋण खाता संख्या, स्वीकृति की तारीख और वितरण की तारीख जैसी जानकारी पोर्टल पर अपडेट करनी होती है।

ऐसे में सतना के मामले में यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि संबंधित हितग्राही के नाम पर कब आवेदन हुआ, किस शाखा ने स्वीकृति दी, ऋण खाता संख्या क्या है, कितनी राशि स्वीकृत हुई, किस तारीख को वितरण दर्ज हुआ और किस खाते में राशि भेजी गई।

अगर हितग्राही के नाम पर वितरण दर्ज है, तो बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित खाते का सत्यापन इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

लोन नहीं मिला तो दूसरी ट्रेंच के लिए पात्र कैसे

PM SVANidhi की मौजूदा व्यवस्था में दूसरी ट्रेंच के लिए पात्रता पिछली ट्रेंच के सफल पुनर्भुगतान से जुड़ी है। मौजूदा बैंक दिशा-निर्देशों के मुताबिक पहली ट्रेंच ₹15 हजार तक, दूसरी ₹25 हजार तक और तीसरी ₹50 हजार तक है। दूसरी और तीसरी ट्रेंच का वितरण पिछली ट्रेंच के सफल पुनर्भुगतान पर निर्भर करता है।

ऐसे में यदि किसी हितग्राही के मोबाइल पर पहली ट्रेंच बंद होने और दूसरी ट्रेंच के लिए पात्र होने का संदेश आया है, जबकि उसका दावा है कि पहली ट्रेंच की राशि उसे मिली ही नहीं, तो लोन अकाउंट और repayment history की जांच जरूरी हो जाती है।

PM स्वनिधि में कितना मिलता है लोन

मौजूदा संशोधित व्यवस्था के अनुसार PM SVANidhi में स्ट्रीट वेंडर्स को तीन चरणों में ऋण की सुविधा दी जाती है:

  • पहली ट्रेंच: ₹5,000 से ₹15,000 तक
  • दूसरी ट्रेंच: ₹15,000 से ₹25,000 तक
  • तीसरी ट्रेंच: ₹30,000 से ₹50,000 तक

लीड बैंक मैनेजर द्वारा जांच कराने की बात कही गई है। अब बैंक रिकॉर्ड, पोर्टल की एंट्री, संबंधित खाते और मैसेज के स्रोत की जांच से ही पता चलेगा कि मामला बैंकिंग/पोर्टल प्रक्रिया की गलती, तकनीकी समस्या, गलत एंट्री या किसी अन्य अनियमितता से जुड़ा है।

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