कुलसचिव कार्यालय में नशे की हालत में पहुंचा कर्मचारी, सस्पेंड

जबलपुर। डिजिटल डेस्क

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में कुलसचिव कार्यालय में कथित तौर पर नशे की हालत में पहुंचकर अभद्र व्यवहार और हाथापाई का प्रयास करने वाले कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबन के साथ उसका मुख्यालय कटनी स्थित व्यंकटेश लाइब्रेरी तय किया है।

कुलसचिव कार्यालय में पहुंचकर किया हंगामा

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल अपने कक्ष में बैठकर काम कर रहे थे। इसी दौरान चौकीदार रविन्द्र तिवारी कार्यालय के अंदर पहुंचा।

कुलसचिव का आरोप है कि रविन्द्र तिवारी नशे की हालत में था और कार्यालय में पहुंचते ही अभद्र व्यवहार करने लगा। उसने हाथापाई का प्रयास भी किया, लेकिन वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर उसे रोक लिया।

अचानक हुई घटना से कार्यालय में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में तत्काल कार्रवाई की।

निलंबन के साथ कटनी किया मुख्यालय

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के तहत रविन्द्र तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

निलंबन अवधि में उसका मुख्यालय कटनी स्थित व्यंकटेश लाइब्रेरी निर्धारित किया गया है। उसे वहां नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

निलंबन आदेश के अनुसार इस अवधि में रविन्द्र तिवारी के कुलसचिव कार्यालय में प्रवेश पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

एक अन्य मामले में दो कर्मचारियों को नोटिस

इधर, एक अन्य मामले में कुलसचिव कार्यालय ने कर्मचारी गजेंद्र सिंह और जितेंद्र तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। दोनों कर्मचारियों के कुलगुरु कार्यालय में अटैच होने की जानकारी सामने आई है।

निलंबन आदेश और नोटिस जारी होने के बाद विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बीच इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कर्मचारियों के एक वर्ग का कहना है कि कुलगुरु कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों पर कार्रवाई से पहले कुलगुरु से अनुमोदन या चर्चा की जानी चाहिए थी।

हालांकि, इस संबंध में कुलगुरु कार्यालय की ओर से कोई पक्ष सामने नहीं आया है।

पहले भी मारपीट की शिकायत का दावा

कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने कहा कि रविन्द्र तिवारी पर पहले भी सहायक कुलसचिव के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था और उस मामले में थाने में शिकायत दर्ज है।

रादुविवि के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने कहा- कर्मचारी के हौसले बढ़ते जा रहे थे। ऐसे में कठोर कार्रवाई की जरूरत थी। इसी वजह से उसे सस्पेंड करने के साथ ट्रांसफर भी किया गया है।

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