सतना। डिजिटल डेस्क
सतना में सिविल कोर्ट ने 10 लाख रुपये की वसूली से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री सईद अहमद और उनकी फर्म के खिलाफ फैसला सुनाया है। प्रथम व्यवहार न्यायाधीश प्रवीण कुमार सोंधिया (वरिष्ठ खंड) की अदालत ने कुसुम जैन के पक्ष में फैसला देते हुए 10 लाख रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह मामला पारिवारिक संबंधों के चलते दिए गए कथित उधार और उसके भुगतान को लेकर था। अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद वादिया के दावे को प्रमाणित माना।
क्या है 10 लाख रुपये के लेनदेन का मामला
वादिया कुसुम जैन के अधिवक्ता एमई आमिर के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पारिवारिक संबंध थे। इसी वजह से पूर्व मंत्री सईद अहमद ने डॉ. राजेश जैन से 10 लाख रुपये उधार लिए थे। यह लेनदेन लिखित रूप में हुआ था।
अधिवक्ता के मुताबिक, रकम के बदले 19 सितंबर 2016 की तारीख का एक चेक जारी किया गया था। आरोप है कि जिस फर्म के नाम से चेक जारी किया गया, वह पहले से बंद थी। राशि वापस नहीं मिलने पर कुसुम जैन की ओर से प्रतिवादी को नोटिस भेजा गया।
इसके बाद भी भुगतान नहीं होने पर रकम की वसूली के लिए सिविल कोर्ट में दावा पेश किया गया।
प्रतिवादी पक्ष ने क्या दलील दी?
मामले में प्रतिवादी पक्ष की ओर से कहा गया कि उधार ली गई रकम एक दलाल के माध्यम से वापस कर दी गई थी। उनका दावा था कि राशि लौटाने के बाद भी वादिया ने चेक वापस नहीं किया।
इस तरह अदालत के सामने मुख्य विवाद 10 लाख रुपये के भुगतान और कथित वापसी को लेकर था। दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुनाया।
अदालत ने 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया
प्रकरण का परीक्षण करने के बाद प्रथम व्यवहार न्यायाधीश प्रवीण कुमार सोंधिया (वरिष्ठ खंड) ने वादिया कुसुम जैन के दावे को प्रमाणित माना। अदालत ने मेसर्स सतना बीडी लीब्स ट्रेडर्स, नजीराबाद और उसके संचालक सईद अहमद को 10 लाख रुपये की राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया।
इस फैसले के बाद अब मामले में अदालत के आदेश के अनुसार राशि के भुगतान का दायित्व संबंधित प्रतिवादियों पर होगा।