सतना। डिजिटल डेस्क
सतना नगर को प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत स्वीकृत 20 इलेक्ट्रिक सिटी बसों की मंजूरी निरस्त कर दी गई है। राज्य स्तरीय संचालन समिति की 21 मई 2026 की बैठक में इन बसों को इंदौर, भोपाल और जबलपुर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
स्वीकृति निरस्त होने के बाद अब सतना के महापौर योगेश कुमार ताम्रकार ने शासन स्तर पर इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठाई है। उन्होंने 24 सितंबर 2026 को अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग संजय दुबे को पत्र भेजकर सतना की बसों की स्वीकृति यथावत रखने का आग्रह किया है।
महापौर ने मुख्यमंत्री को भी लिखा था पत्र
महापौर ने इससे पहले 3 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। उनके अनुसार सतना के जनप्रतिनिधियों को बसों की स्वीकृति निरस्त किए जाने की जानकारी समय पर नहीं दी गई।
पत्र के मुताबिक उन्हें इस निर्णय की जानकारी 28 जून 2026 को समाचार पत्रों के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्होंने शासन स्तर पर मामले को उठाते हुए स्वीकृति बहाल करने की मांग की।
सतना के लिए क्यों जरूरी हैं सिटी बसें
महापौर ने अपने पत्र में सतना को विंध्य क्षेत्र का प्रमुख औद्योगिक, शैक्षणिक, व्यापारिक और धार्मिक केंद्र बताया है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी, कामगार, व्यापारी और श्रद्धालु आवागमन करते हैं।
शहर में व्यवस्थित नगरीय बस सेवा नहीं होने के कारण महिलाओं, विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन की समस्या का सामना करना पड़ता है। महापौर ने इसी आधार पर 20 इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत को रेखांकित किया है।
AMRUT 1.0 के तहत भी भेजा जा चुका है प्रस्ताव
महापौर के मुताबिक बताया है कि सतना सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड की ओर से AMRUT 1.0 योजना के तहत 40 प्रतिशत VGF सहायता पर 20 इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का विस्तृत प्रस्ताव पहले ही विभाग को भेजा जा चुका है।
उनका कहना है कि इस प्रस्ताव के माध्यम से सतना में इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू करने का विकल्प भी उपलब्ध है।
निरस्तीकरण आदेश पर पुनर्विचार की मांग
महापौर ने अपर मुख्य सचिव से 21 मई 2026 के निर्णय के आधार पर सतना के लिए स्वीकृत 20 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी निरस्त करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
उन्होंने शासन स्तर पर पहल कर सतना के पक्ष में सकारात्मक अनुशंसा करने और बसों की स्वीकृति यथावत रखने की मांग की है।