113 करोड़ की सीवर परियोजना पर सिंधिया नाराज, अब MPUDC संभालेगा काम

शिवपुरी। डिजिटल डेस्क

शिवपुरी की करीब 113 करोड़ रुपये की सीवर परियोजना को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नाराजगी जताई है। परियोजना पर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच इसे मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPUDC) के जरिए आगे बढ़ाने की बात सामने आई है।

परियोजना का उद्देश्य शहर की सीवर व्यवस्था को दुरुस्त करने और गंदे पानी को झीलों में जाने से रोकना था, लेकिन परियोजना पूरी होने के बाद भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो सका। मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी परियोजना की योजना, घरेलू कनेक्शन और क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल दर्ज हैं।

111 करोड़ के निवेश पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के 24 जून 2026 के आदेश के मुताबिक राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि परियोजना के तहत सीवर लाइन और STP का काम 2019 में पूरा हो गया था। लेकिन STP तक पर्याप्त सीवेज नहीं पहुंचने के कारण पूरा सिस्टम उपयोगी नहीं बन पाया।

सरकार की ओर से बताया गया कि व्यक्तिगत घरों को मुख्य सीवर लाइन से जोड़ने की जिम्मेदारी नगर पालिका की थी और यह काम मूल परियोजना में शामिल नहीं था। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल किया कि जब घरों से सीवेज मुख्य लाइन तक पहुंचना सुनिश्चित नहीं था, तो इतनी बड़ी परियोजना तैयार करने का औचित्य क्या था। अदालत ने करीब 111 करोड़ रुपये के निवेश के सार्वजनिक धन के व्यर्थ होने की आशंका भी दर्ज की।

2019 में काम पूरा, फिर भी नहीं चली व्यवस्था

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना को 2006 में राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना (NLCP) के तहत मंजूरी मिली थी। 2009 में इसे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सौंपा गया। 2011 में संशोधित DPR तैयार हुई और 2013 में इसे मंजूरी मिली। अगस्त 2013 में कार्यादेश जारी हुआ और 2019 में सीवर लाइन तथा STP का काम पूरा बताया गया।

बाद में सामने आया कि घरेलू कनेक्शन पर्याप्त संख्या में नहीं होने के कारण सीवेज STP तक नहीं पहुंच रहा था।

घरों के कनेक्शन के लिए अलग से करना पड़ा इंतजाम

फरवरी 2026 में हाईकोर्ट के सामने बताया गया कि घरेलू सीवर कनेक्शन अभी किए जाने बाकी थे और इसके लिए करीब 16 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई थी। कोर्ट रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि कुछ इंटरकनेक्शन और STP से संबंधित काम बाकी था।

वहीं मध्यप्रदेश विधानसभा में अगस्त 2025 में सरकार ने बताया था कि शिवपुरी का सीवर प्रोजेक्ट पूरी तरह पूरा नहीं हुआ था। कुछ स्थानों पर इंटरकनेक्शन बाकी थे। संकरी गलियों और सेप्टिक टैंक वाले क्षेत्रों में सीवर लाइन नहीं बिछाई गई थी। इन क्षेत्रों को जोड़ने का काम नगर पालिका द्वारा AMRUT 2.0 के तहत प्रस्तावित बताया गया था।

मरम्मत पर भी खर्च की जरूरत पड़ी

23 जून 2026 के हाईकोर्ट रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि सीवर लाइन की मरम्मत के लिए 8 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए थे। अदालत ने इस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पहले से बिछाई गई लाइन प्रभावी नहीं हुई, तो अतिरिक्त धन खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

2 जुलाई के आदेश में अदालत के सामने यह भी बताया गया कि जांच में यदि काम निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है और अधिकारियों या ठेकेदारों की मिलीभगत से गलत रिपोर्ट दिए जाने की पुष्टि होती है, तो राज्य को हुए नुकसान की वसूली संबंधित लोगों से की जाएगी।

भ्रष्टाचार का आरोप, लेकिन जांच का निष्कर्ष बाकी

सिंधिया ने परियोजना में कथित अनियमितताओं को लेकर नाराजगी जताई है और हालिया रिपोर्टों में परियोजना को लेकर भ्रष्टाचार के आरोपों का उल्लेख किया गया है। विपक्ष की ओर से भी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग सामने आई है।

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