सीहोर। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 11 अक्टूबर 2026 को सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में धरने पर बैठ गए। गांव में बारेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकान तोड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। शिवराज ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से फोन पर बात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने परिवारों के लिए नए मकान और अस्थायी राहत की व्यवस्था कराने का आश्वासन भी दिया। 12 अक्टूबर की सुबह प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, देर रात तक चला धरना समाप्त हो गया था।
कोसमी गांव में 12 परिवारों के मकान तोड़े गए
11 अक्टूबर को सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में वन विभाग और वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान बारेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकान तोड़े गए। रिपोर्टों में खेतों में खड़ी मक्का और तुअर की फसल को नुकसान पहुंचने तथा एक कुएं को मिट्टी से भरने की जानकारी भी सामने आई।
वन विभाग की ओर से कार्रवाई को आरक्षित वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बताया गया। कार्रवाई से संबंधित विस्तृत आदेश और प्रभावित परिवारों को जारी किए गए नोटिस का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने पर मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान
मकान तोड़े जाने की जानकारी मिलने पर शिवराज सिंह चौहान कोसमी गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद वह परिवारों के साथ धरने पर बैठ गए।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बुधनी के विधायक रमाकांत भार्गव भी उनके साथ धरने में शामिल हुए। शिवराज ने मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचने की कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
मुख्य सचिव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से की बात
धरने के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी मामले पर चर्चा की।
शिवराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने मामला उठाने की बात कही। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए आवास की व्यवस्था कराने और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के मामले में कदम उठाने की मांग की।
अपनी ही सरकार के प्रशासनिक अमले पर जताई नाराजगी
मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है और शिवराज सिंह चौहान केंद्र में मंत्री हैं। उन्होंने कोसमी गांव की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों के मकान और फसलें नष्ट होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने की बात कही। उनका विरोध वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर था।
पहले भी उठ चुका था मकानों का मामला
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकानों को लेकर पहले भी विवाद हुआ था। शिवराज सिंह चौहान ने इससे पहले अधिकारियों से परिवारों के मकान नहीं तोड़ने का अनुरोध किया था।
इससे जुड़े पुराने प्रशासनिक आदेशों और कार्रवाई के रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग के दस्तावेज आवश्यक हैं।
प्रभावित परिवारों को नए मकान देने का आश्वासन
शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों के लिए नए पक्के मकानों की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्थायी आवास मिलने तक अस्थायी रूप से रहने और भोजन की व्यवस्था कराने की बात भी कही।
हालांकि नए मकानों की स्वीकृति, आर्थिक सहायता और फसल नुकसान की भरपाई के संबंध में जारी आधिकारिक आदेश या सहायता वितरण का विवरण उपलब्ध नहीं है।
धरना समाप्त, DFO को हटाए जाने की भी आई खबर
12 अक्टूबर की सुबह प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान देर रात तक धरने पर बैठे रहे। इसके बाद वह धरना स्थल से भोपाल लौटे और सोमवार सुबह दिल्ली रवाना हो गए।
इसी मामले के बीच सीहोर के वन मंडल अधिकारी मगन सिंह डाबर को हटाए जाने और उनकी जगह अर्चना पटेल को जिम्मेदारी दिए जाने की खबरें भी सामने आईं।
अब आगे क्या
कोसमी गांव में हुई कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के आवास, फसल नुकसान और पुनर्वास से जुड़े सवाल सामने आए हैं। शिवराज सिंह चौहान ने परिवारों के लिए नए मकानों और अस्थायी राहत का आश्वासन दिया है। प्रशासन की ओर से पुनर्वास, मुआवजे और कार्रवाई के आदेश के संबंध में जारी आधिकारिक जानकारी से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।