सियाल घोघरी खदान में दो महिला कामगार फिर बेहोश

छिंदवाड़ा। डिजिटल डेस्क

निजी कोयला ब्लॉक सियाल घोघरी की भूमिगत खदान में बुधवार को प्रथम पाली के दौरान दो महिला कामगार अचानक अचेत हो गईं। दोनों को तत्काल निजी अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया। स्थिति सामान्य होने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। लगभग 12 दिन के अंतराल में खदान के अंदर महिला कामगारों के बेहोश होने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 11 सितंबर को भी दो महिला कामगारों की तबीयत काम के दौरान बिगड़ी थी।

गर्मी और कम हवा के बीच काम करने का आरोप

जानकारी के अनुसार बुधवार को महिला कामगार ज्योति डेहरिया और संगीता डेहरिया को खदान के डब्ल्यू-011/टी-13 एलएलडी साइड के गर्म सेक्शन पैनल में ड्रिलिंग कार्य के लिए भेजा गया था।

श्रम संगठन इंटक का आरोप है कि संबंधित हिस्से में हवा का प्रवाह कम और गर्मी अधिक थी। दोपहर में दोनों महिलाओं ने सिर दर्द की शिकायत की और इसके बाद उल्टियां करते हुए बेहोश हो गईं।

इंटक का कहना है कि लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए खदान में कामगारों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूरी है। हालांकि, बेहोशी की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

11 सितंबर की घटना के बाद दी गई थी शिकायत

इससे पहले 11 सितंबर को सियाल घोघरी भूमिगत खदान में दो महिला कामगारों की तबीयत काम के दौरान बिगड़ी थी। उपलब्ध रिपोर्टों में इंटक ने डब्ल्यू-11 सेक्शन में कम हवा और अधिक गर्मी को लेकर सवाल उठाए थे।

इसके बाद 12 सितंबर को इंटक ने उमरेठ थाने में खदान प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की थी।

इंटक का आरोप है कि संगठन की टीम बाद में खदान का निरीक्षण करने पहुंची थी, लेकिन प्रबंधन ने निरीक्षण की अनुमति नहीं दी।

भूमिगत खदान में काम कर रही हैं 28 महिलाएं

सियाल घोघरी की मुआरी भूमिगत कोयला खदान में जून की शुरुआत से करीब 28 महिला कामगारों के भूमिगत कार्य करने की जानकारी सामने आई है।

बताया गया है कि खदान में काम पर भेजे जाने से पहले महिला कामगारों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। खदान की गहराई करीब 380 मीटर बताई गई है।

सियाल घोघरी भूमिगत कोयला खदान छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ-परासिया क्षेत्र में स्थित है। सरकारी पर्यावरण दस्तावेजों में भी इस परियोजना का उल्लेख उमरेठ एवं परासिया तहसील के गांवों से जुड़े भूमिगत कोयला खदान प्रोजेक्ट के रूप में मिलता है।

खान सुरक्षा निदेशालय की कार्रवाई पर निगाह

लगातार दूसरी घटना सामने आने के बाद अब कामगारों और श्रम संगठनों की निगाह खान सुरक्षा निदेशालय की कार्रवाई पर है।

इंटक का कहना है कि खदान में सुरक्षित परिस्थितियों में उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन को आवश्यक सुधार करने चाहिए। संगठन की ओर से इस संबंध में शिकायत और सुझाव दिए जाने की बात कही गई है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित खान सुरक्षा अधिकारी मामले की जांच में किन तथ्यों को सामने लाते हैं और खदान में कामगारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या निर्देश जारी किए जाते हैं।

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