सतना। डिजिटल डेस्क
सतना जिले के उचेहरा में बरुआ नदी में डूबे 47 वर्षीय अजय शुक्ला का शव चौथे दिन बरामद हुआ। शव घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर बड़ी पुल के पास एक पेड़ की जड़ में फंसा मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया।
26 सितंबर को नदी में लापता हुए थे अजय
अजय शुक्ला पुत्र स्वर्गीय जानकी प्रसाद, निवासी वार्ड क्रमांक-6 उचेहरा, 26 सितंबर को अपने दोस्त राहुल ताम्रकार के साथ सन्यासी टोला घाट पहुंचे थे। दोनों बरुआ नदी में नहाने के लिए उतरे थे।
बताया गया कि कुछ दूर तक तैरने के बाद अजय अचानक लापता हो गए। इसके बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने नदी में उनकी तलाश शुरू की थी।
चौथे दिन पेड़ की जड़ में मिला शव
लगातार तलाश के बाद चौथे दिन अजय का शव घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर बड़ी पुल के पास मिला। शव नदी में एक पेड़ की जड़ में फंसा हुआ था।
गोताखोरों ने शव को नदी से बाहर निकालकर किनारे पर रखा। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम कराया।
शव ले जाने के लिए भेजी कचरा गाड़ी
मामले में सबसे गंभीर स्थिति शव को नदी किनारे से मरचुरी तक ले जाने के दौरान सामने आई। आरोप है कि मौके पर शव वाहन उपलब्ध नहीं था। नगर परिषद की ओर से भी शव ले जाने के लिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
पुलिसकर्मियों द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किए जाने के बाद नगर परिषद की ओर से कचरा उठाने वाली गाड़ी भेजे जाने की बात सामने आई है। इसी वाहन में शव रखकर मरचुरी ले जाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के फोटो और वीडियो भी सामने आए हैं।
लंबे समय से शव वाहन की कमी का आरोप
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया गया है कि उचेहरा में लंबे समय से शव वाहन उपलब्ध नहीं है। इस समस्या से संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराए जाने के बावजूद अब तक स्थायी व्यवस्था नहीं की गई।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव प्रयागराज ले जाना था। इसके लिए उन्हें निजी खर्च पर वाहन की व्यवस्था करनी पड़ी। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शव प्रयागराज ले जाया गया।
जांच और जिम्मेदारी पर सवाल
अजय शुक्ला की मौत के मामले में पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर उसे परिजनों को सौंप दिया है। वहीं, शव को कचरा वाहन से ले जाने का मामला सामने आने के बाद नगर परिषद की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।