मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार शाम थम गया। अब सभी की नजर 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे मुकाबला बेहद रोचक और कांटे का माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। अब उम्मीदवार केवल घर-घर संपर्क कर सकते हैं, जबकि सार्वजनिक सभाओं और रैलियों पर रोक लागू हो गई है। प्रशासन ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला
इस उपचुनाव में भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर दांव लगाया है। प्रचार अभियान के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने सभाएं कीं। वहीं कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई नेताओं ने चुनाव प्रचार संभाला।
प्रचार में छाए रहे ये मुद्दे
पूरे चुनाव अभियान के दौरान विकास कार्य, किसानों के मुद्दे, ओबीसी आरक्षण, स्थानीय समस्याएं और कानून-व्यवस्था प्रमुख चुनावी मुद्दे रहे। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की।
30 जुलाई को मतदान, 3 अगस्त को आएंगे नतीजे
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। मतगणना 3 अगस्त को होगी और उसी दिन यह तय हो जाएगा कि सीट पर भाजपा कब्जा बरकरार रखती है या कांग्रेस वापसी करती है।
प्रशासन की तैयारियां पूरी
जिला प्रशासन ने सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने का दावा किया है। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा और चुनाव प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जाएगी।
क्या दांव पर है
दतिया उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार और कांग्रेस, दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि दोनों दलों के दिग्गज नेताओं ने पूरे चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई।