नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
दीपावली पर पटाखे जलाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले सुरक्षा और नियमों की जानकारी जरूर हासिल कर लें। पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों, सांस के मरीजों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
पटाखे जलाने से जुड़े नियमों में उनके प्रकार, इस्तेमाल के समय और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का विशेष महत्व है। ऐसे में त्योहार की खुशियों के बीच कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है।
पटाखे जलाने के समय का रखें ध्यान
पटाखे जलाने की समय-सीमा संबंधित क्षेत्र में लागू सरकारी आदेशों और न्यायालय के निर्देशों पर निर्भर करती है। इसलिए दीपावली पर पटाखे जलाने से पहले जिला प्रशासन या पुलिस की ओर से जारी ताजा निर्देश जरूर देखें।
दिल्ली-एनसीआर सहित कुछ क्षेत्रों में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर विशेष प्रतिबंध लागू हो सकते हैं। ऐसे नियमों को पूरे देश में एक जैसा मानना सही नहीं है। सतना और मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में भी स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
प्रतिबंधित पटाखों से बनाएं दूरी
पटाखे खरीदते समय उनकी पैकेजिंग और प्रमाणन की जांच करें। केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदें और प्रतिबंधित उत्पादों से दूर रहें।
ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए पैकेट पर निर्धारित चिह्न और क्यूआर कोड देखें। हालांकि, ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं होते। इसलिए उनका इस्तेमाल भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही करना चाहिए।
पटाखे जलाते समय इन सावधानियों का रखें ध्यान
पटाखे जलाते समय छोटी-सी लापरवाही भी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए इन बातों का ध्यान रखें:
पटाखे हमेशा खुले और सुरक्षित स्थान पर जलाएं।
पटाखे जलाते समय बच्चों को अकेला न छोड़ें।
ढीले, सिंथेटिक या आसानी से आग पकड़ने वाले कपड़े पहनकर पटाखे न जलाएं।
पटाखे जलाने के लिए लंबी अगरबत्ती या सुरक्षित दूरी बनाए रखने वाला साधन इस्तेमाल करें।
पटाखे जलाते समय चेहरा और हाथ उनसे दूर रखें।
जल चुके या नहीं फूटे पटाखे को दोबारा जलाने की कोशिश न करें।
पटाखों के पास पानी की बाल्टी और प्राथमिक उपचार का सामान रखें।
पटाखों को घर के अंदर, वाहनों के पास या ज्वलनशील सामान के आसपास न जलाएं।
पटाखे जलाते समय आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें और बच्चों को चिंगारियों से दूर रखें।
तेज आवाज वाले पटाखों से बचें
तेज आवाज वाले पटाखे बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और पालतू जानवरों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। लगातार तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है।
इसलिए कम आवाज वाले विकल्प चुनें और अस्पतालों, स्कूलों तथा अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास लागू प्रतिबंधों का पालन करें। पटाखे जलाते समय आसपास के लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखें।
पटाखे से जलने पर क्या करें
पटाखे से जलने पर प्रभावित हिस्से को जल्द से जल्द ठंडे बहते पानी के नीचे लगभग 20 मिनट तक रखें। जले हुए हिस्से पर बर्फ, टूथपेस्ट, घी या तेल न लगाएं।
त्वचा पर बड़े छाले पड़ने, गहरी चोट लगने या चेहरे और आंखों में चोट पहुंचने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। आंख में पटाखे का कण जाने पर उसे रगड़ने की कोशिश न करें।
नियमों का पालन करके मनाएं सुरक्षित दिवाली
दीपावली खुशियों और रोशनी का त्योहार है। थोड़ी-सी सावधानी से पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं और प्रदूषण के जोखिम को कम किया जा सकता है।
पटाखे जलाने से पहले स्थानीय प्रशासन के ताजा निर्देशों की जानकारी लें, बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें और दूसरों की सेहत व सुविधा का सम्मान करते हुए त्योहार मनाएं।