8 एयरपोर्ट पर लगेंगे फुल-बॉडी स्कैनर, भारतीय यात्रियों के हिसाब से बदले जाएंगे एल्गोरिदम

नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क

देश के आठ प्रमुख एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुरक्षा जांच के लिए फुल-बॉडी स्कैनर लगाने की तैयारी तेज हो गई है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) के मुताबिक इन स्कैनरों की तकनीक और एल्गोरिदम को भारतीय यात्रियों के पहनावे और आमतौर पर शरीर पर पहनी जाने वाली वस्तुओं के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। फिलहाल कुछ एयरपोर्ट पर ट्रायल से मिले डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है।

जिन आठ एयरपोर्ट के लिए फुल-बॉडी स्कैनर की मंजूरी बताई गई है, उनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि और अहमदाबाद शामिल हैं। हालांकि BCAS की ताजा जानकारी के मुताबिक बेंगलुरु और कोच्चि में चल रहे ट्रायल को डेटा जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और कोच्चि उन आठ एयरपोर्ट की सूची में शामिल नहीं है जहां तैनाती निर्धारित है।

फुल-बॉडी स्कैनर कैसे काम करेगा

फुल-बॉडी स्कैनर का उद्देश्य यात्री के कपड़ों के नीचे छिपी या शरीर पर रखी संदिग्ध वस्तुओं का पता लगाना है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के तकनीकी दस्तावेज के अनुसार मिलिमीटर-वेव आधारित बॉडी स्कैनर बिना शारीरिक संपर्क और कपड़े उतारे शरीर पर छिपी वस्तुओं का पता लगा सकते हैं। इस तकनीक में आयनाइजिंग रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता।

नई व्यवस्था में यात्रियों की वास्तविक तस्वीर दिखाने के बजाय सामान्य 3D मॉडल दिखाने की व्यवस्था की जा रही है। किसी संदिग्ध वस्तु का पता चलने पर सिस्टम उसके स्थान की पहचान करेगा, ताकि सुरक्षा जांच के दौरान यात्री की पहचान और शारीरिक बनावट सीधे प्रदर्शित न हो।

भारतीय कपड़ों और आभूषणों के लिए बदले जाएंगे एल्गोरिदम

फुल-बॉडी स्कैनर की सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग तरह के कपड़ों और शरीर पर पहनी जाने वाली वस्तुओं से उत्पन्न होने वाले अनावश्यक अलार्म को कम करना है।

BCAS के महानिदेशक राजेश निर्वाण के मुताबिक मौजूदा एल्गोरिदम काफी हद तक विदेशी बाजारों के लिए तैयार किए गए हैं। भारत में पहने जाने वाले आभूषण और अन्य सामान्य वस्तुओं के कारण गलत अलार्म की स्थिति बन सकती है। इसलिए ट्रायल से मिलने वाले डेटा के आधार पर एल्गोरिदम में बदलाव किया जा रहा है।

तीन एयरपोर्ट पर पहुंच चुकी हैं मशीनें

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक आठ चयनित एयरपोर्ट में से तीन पर स्कैनर पहुंच चुके हैं। बाकी पांच एयरपोर्ट पर मशीनों की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं बेंगलुरु और कोच्चि में चल रहे परीक्षणों के दौरान मशीन से उत्पन्न अलार्म समेत अन्य आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।

इन आंकड़ों का इस्तेमाल यह देखने के लिए किया जा रहा है कि मशीन कितनी सटीकता से संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करती है और कितनी बार ऐसी वस्तुओं पर अलार्म देती है जो वास्तव में सुरक्षा खतरा नहीं हैं।

प्राइवेसी को लेकर क्या व्यवस्था होगी

फुल-बॉडी स्कैनर को लेकर सबसे प्रमुख सवाल यात्रियों की निजता से जुड़ा रहा है। सरकार के अनुसार नई तकनीक को ‘पिक्चर एग्नोस्टिक’ बनाया जा रहा है। इसका अर्थ है कि स्क्रीन पर यात्री के शरीर की वास्तविक तस्वीर नहीं दिखाई जाएगी।

इसके बजाय एक सामान्य मॉडल के जरिए संदिग्ध वस्तु की स्थिति बताई जाएगी। इससे सुरक्षा जांच के दौरान यात्री की पहचान या शरीर की वास्तविक आकृति प्रदर्शित होने की संभावना कम होगी।

एयरपोर्ट सुरक्षा में पहले से बढ़ रहा तकनीक का इस्तेमाल

फुल-बॉडी स्कैनर की दिशा में काम नया नहीं है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पहले भी एयरपोर्ट सुरक्षा को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक बनाने की योजना बताई थी, जिसमें संवेदनशील और अति-संवेदनशील एयरपोर्ट पर बॉडी स्कैनर लगाने को प्राथमिकता दी गई थी।

अप्रैल 2026 में BCAS और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच फुल-बॉडी स्कैनर समेत एयरपोर्ट सुरक्षा उपकरणों के परीक्षण और प्रमाणन के लिए एक समर्पित परीक्षण केंद्र स्थापित करने का समझौता भी हुआ था। इसका उद्देश्य सुरक्षा उपकरणों की स्वतंत्र जांच, प्रदर्शन मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए व्यवस्था विकसित करना है।

सामान की जांच के लिए CTX मशीनों पर भी काम

यात्रियों की बॉडी स्कैनिंग के साथ एयरपोर्ट पर सामान की जांच को भी आधुनिक बनाने की तैयारी है। Computed Tomography X-ray यानी CTX मशीनें सामान की 3D स्कैनिंग कर सकती हैं और विस्फोटक सामग्री की पहचान में मदद के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।

नागरिक उड्डयन क्षेत्र में इन मशीनों के तकनीकी मानकों को लेकर भी काम किया जा रहा है।

अभी पूरी तरह लागू नहीं हुई व्यवस्था

फुल-बॉडी स्कैनर को लेकर यह समझना जरूरी है कि आठ एयरपोर्ट पर तैनाती की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, लेकिन सभी जगह इसका नियमित इस्तेमाल शुरू होने की स्थिति अभी नहीं है। ट्रायल से मिले डेटा और एल्गोरिदम में सुधार के बाद तकनीक को व्यापक रूप से लागू किया जाएगा। ताजा रिपोर्टों में सभी आठ एयरपोर्ट पर नियमित संचालन की कोई निश्चित अंतिम तारीख नहीं बताई गई है।

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