गुरु को भारतीय संस्कृति में ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार सुबह से देशभर के प्रमुख आश्रमों, मठों और आध्यात्मिक केंद्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कहीं गुरु चरण वंदन हुआ तो कहीं यज्ञ, भंडारे और सत्संग के आयोजन किए गए। गुरु का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु सुबह से ही लंबी कतारों में नजर आए।
इन 5 प्रमुख गुरु धामों में सबसे अधिक रही श्रद्धालुओं की आस्था
1. गोरखनाथ मठ, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
नाथ संप्रदाय की सबसे प्रमुख पीठों में शामिल गोरखनाथ मठ में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परंपरा के अनुसार गुरु पूजन किया। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की है।
2. चित्रकूट (मध्य प्रदेश–उत्तर प्रदेश)
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में गुरु पूर्णिमा पर विशेष आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। कामदगिरि परिक्रमा, रामघाट और विभिन्न संत आश्रमों में गुरु पूजन, भजन, सत्संग और भंडारों का आयोजन किया गया। विंध्य क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचे।
3. शांतिकुंज, हरिद्वार (उत्तराखंड)
अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज में गुरु पूर्णिमा पर विशेष यज्ञ, सामूहिक साधना और गुरु वंदन कार्यक्रम आयोजित किए गए। देशभर से पहुंचे साधकों ने आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और गुरु आशीर्वाद प्राप्त किया।
4. बेलूर मठ, हावड़ा (पश्चिम बंगाल)
रामकृष्ण मठ एवं मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में श्रीरामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की परंपरा के अनुसार गुरु पूर्णिमा मनाई गई। विशेष प्रार्थना, ध्यान और आध्यात्मिक प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
5. ईशा योग केंद्र, कोयंबटूर (तमिलनाडु)
आदियोगी की पावन भूमि ईशा योग केंद्र में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष ध्यान, योग साधना और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। देश-विदेश से जुड़े साधकों ने ऑनलाइन और प्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रमों में भागीदारी की।
गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन किया, महाभारत की रचना की और पुराणों का संपादन किया। इसलिए उन्हें ‘आदि गुरु’ का सम्मान दिया जाता है। इसी कारण आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व माना जाता है।
बौद्ध परंपरा में भी इस दिन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में अपना पहला उपदेश इसी दिन दिया था। इसलिए बौद्ध अनुयायी भी इस दिन को श्रद्धा के साथ मनाते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालु क्या करते हैं?
- गुरु का पूजन और चरण वंदन
- गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करना
- गुरु दक्षिणा अर्पित करना
- यज्ञ, हवन और भजन-कीर्तन में भाग लेना
- सत्संग और आध्यात्मिक प्रवचन सुनना
- प्रसाद एवं भंडारे में शामिल होना
प्रशासन ने की विशेष व्यवस्थाएं
देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पार्किंग, चिकित्सा सहायता, पेयजल, बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है। कई स्थानों पर मानसून को देखते हुए फिसलन वाले क्षेत्रों में भी अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व
उपनिषदों से लेकर संत परंपरा तक भारतीय संस्कृति में गुरु को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक माना गया है। कबीरदास का प्रसिद्ध दोहा—
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।”
आज भी गुरु के महत्व को उसी श्रद्धा के साथ व्यक्त करता है।