ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन, दिल्ली में 500 से ज्यादा हिरासत में

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सितंबर के अंतिम सप्ताह से विरोध-प्रदर्शन तेज हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग उनके इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े सवालों के समाधान की रही है।

25 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच दिल्ली, लखनऊ, पटना, गुवाहाटी, जयपुर और आगरा समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। 2 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन खास तौर पर चर्चा में रहा।

दिल्ली में क्या हुआ

जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर को AAP नेताओं, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में AISA, SFI, NSUI और अन्य संगठनों के लोग शामिल हुए।

दिल्ली पुलिस के अनुसार जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में AAP नेता आतिशी, सौरभ भारद्वाज, संजीव झा और संजय सिंह समेत छात्र संगठन से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी और क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की।

इससे पहले 26 सितंबर को भी जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान कम से कम 60 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वकील प्रशांत भूषण और AISA नेता नेहा बोरा समेत अन्य लोग शामिल थे।

मुंबई में CJP का प्रदर्शन

मुंबई में 2 अक्टूबर को Cockroach Janta Party (CJP) ने छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क के पास प्रदर्शन किया। संगठन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन को आगे देश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की बात कही थी। संगठन की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, 2025 में तैयार मतदाता सूची को आधार बनाकर चुनाव कराने की मांग और अगले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल है।

मुंबई पुलिस ने पहले इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद CJP ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की थी। 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

25 सितंबर को कई राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध की शुरुआत केवल दिल्ली और मुंबई तक सीमित नहीं रही। 25 सितंबर को कांग्रेस ने देश के कई राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन किया।

कांग्रेस ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली के अलावा लखनऊ, गुवाहाटी और पटना समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए।

पटना में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने SIR के जरिए मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। यह प्रदर्शनकारियों का आरोप था, जिसे स्वतंत्र रूप से मतदाता सूची के हर मामले पर सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान पुलिस से टकराव

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारी विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे।

पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोका। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

आगरा में ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन

29 सितंबर को आगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान घर के मुख्य गेट पर नारे लिखे जाने की बात सामने आई, जिन्हें बाद में पुलिस ने हटाया।

पुलिस ने कांग्रेस नेता अनिल यादव और मथुरा जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी।

यह घटना बाकी प्रदर्शनों से अलग रही, क्योंकि इसमें प्रदर्शन स्थल को लेकर सीधे तौर पर ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास को चुना गया था।

विरोध की मुख्य वजह क्या है

विरोध का सबसे बड़ा मुद्दा Special Intensive Revision यानी SIR है। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है।

इसके अलावा सितंबर में प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग से जुड़े कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने, Form-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए।

चुनाव आयोग का क्या कहना है

इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय आना बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है। आयोग ने कहा कि SIR और उससे जुड़े फैसले आयोग की ओर से सर्वसम्मति से लिए गए।

आयोग के आधिकारिक SIR आदेश में कहा गया है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया का उद्देश्य सभी पात्र नागरिकों को शामिल करना और किसी पात्र नागरिक को बाहर नहीं करना है।

SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ा

SIR के तहत मतदाता सूची को दोबारा जांचने की प्रक्रिया शुरू की गई है। चुनाव आयोग का तर्क है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नामों की पहचान करना है।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि प्रक्रिया में ऐसे पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं जो दस्तावेज या निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते।

यही मतभेद अब राजनीतिक विरोध और प्रदर्शन का बड़ा मुद्दा बन गया है।

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