अयोध्या। डिजिटल डेस्क
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्रशासनिक और संचालन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। उनके नाम पर 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में अंतिम मुहर लगाई गई।
5585 आवेदनों से तीन नामों तक पहुंची प्रक्रिया
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO के चयन के लिए 6 जुलाई 2026 को तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था। कमेटी में रिटायर्ड न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल थे।
CEO पद के लिए देशभर से कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। प्रारंभिक जांच के बाद 1,580 उम्मीदवारों को योग्य और उपयुक्त माना गया। इसके बाद 108 से अधिक उम्मीदवारों के ऑनलाइन इंटरैक्शन हुए और अंतिम चरण में 16 उम्मीदवारों को अयोध्या में आमने-सामने बातचीत के लिए बुलाया गया।
16 उम्मीदवारों के साथ 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में अंतिम चरण की बातचीत हुई। इसके बाद सर्च कमेटी ने तीन नामों का पैनल तैयार किया और अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी।
1 सितंबर को सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट
सर्च कमेटी ने 1 सितंबर को अपनी 75 पन्नों की रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी। इसमें CEO पद के लिए तीन नामों का पैनल शामिल था। इसके अगले दिन यानी 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में इन नामों पर विचार किया गया और जितेंद्र मिश्रा को CEO चुना गया।
रिपोर्टों के मुताबिक अंतिम तीन उम्मीदवारों में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के अलावा मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह बिष्ट और श्रुति हरद्वारी के नाम शामिल थे।
कौन हैं जितेंद्र मिश्रा
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों में रहे हैं। उन्होंने करीब चार दशक तक वायुसेना में सेवा की और 30 अप्रैल 2026 को वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुए।
वह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मूल निवासी हैं। वायुसेना में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और नेतृत्व वाली जिम्मेदारियां संभालीं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाली थी वेस्टर्न एयर कमांड की कमान
जितेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा रहा है। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान वह भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि और बड़े स्तर पर संचालन का अनुभव CEO पद के लिए उनकी उम्मीदवारी की प्रमुख विशेषताओं में माना गया।
CEO की क्या होगी जिम्मेदारी
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO का पद पहली बार बनाया गया है। जितेंद्र मिश्रा के जिम्मे मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक, परिचालन और प्रबंधन संबंधी कामकाज की जिम्मेदारी होगी।
मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासन, भीड़ प्रबंधन, कर्मचारियों के समन्वय, संचालन और संस्थागत व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करना CEO की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
ट्रस्ट में अन्य बड़े बदलाव भी
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने अपने संगठन में अन्य महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। बैठक में तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की गई। इनमें महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी बनी हैं।
वहीं ट्रस्ट के महासचिव पद की जिम्मेदारी गोविंद देव गिरि को दी गई और महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष बनाया गया।
नियुक्ति ऐसे समय हुई जब ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठे
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब हाल के महीनों में दान राशि और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर विवाद सामने आए थे। इन घटनाओं के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज को और व्यवस्थित करने की जरूरत पर जोर दिया गया।
नए CEO की नियुक्ति को इसी व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि CEO की वास्तविक प्रशासनिक शक्तियां और ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों के साथ उनका कार्य-विभाजन आगे की व्यवस्था में स्पष्ट होगा।
चयन प्रक्रिया में तकनीक का भी इस्तेमाल
CEO चयन प्रक्रिया में तकनीक आधारित स्क्रीनिंग का भी इस्तेमाल किया गया। हजारों आवेदनों की प्रारंभिक जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों को अलग-अलग चरणों में शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके बाद ऑनलाइन इंटरैक्शन और आमने-सामने साक्षात्कार के जरिए उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया गया।
ट्रस्ट की सर्च कमेटी ने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और योग्यता आधारित प्रक्रिया बताया था।
नियुक्ति के बाद भावुक नजर आए जितेंद्र मिश्रा
CEO चुने जाने के बाद जितेंद्र मिश्रा ने ट्रस्ट, चयन समिति और भगवान श्रीराम के प्रति आभार जताया। उन्होंने इस जिम्मेदारी को अपना सौभाग्य बताया और कहा कि वह ट्रस्ट की प्राथमिकताओं को समझकर टीम के साथ मिलकर काम करने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए वह इतिहास से सीखते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे।