पेंच और बैनगंगा क्षेत्र में पक्षियों की सुरक्षा के लिए ट्रांसमिशन लाइनों पर लग रहे विशेष उपकरण

सिवनी। डिजिटल डेस्क

पेंच टाइगर रिजर्व, बैनगंगा नदी क्षेत्र और जिले के अन्य पक्षी संवेदनशील वन क्षेत्रों से गुजरने वाली हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों पर पक्षियों की सुरक्षा के लिए विशेष उपकरण लगाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) 132 केवी, 220 केवी और 400 केवी लाइनों पर बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर, बर्ड गार्ड और बर्ड प्रिवेंटर स्थापित कर रही है।

पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों में प्राथमिकता से हो रहा काम

पेंच टाइगर रिजर्व, बैनगंगा नदी का तटीय क्षेत्र और आसपास के वन क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में स्थानीय पक्षियों के साथ बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की भी आवाजाही होती है।

पक्षियों की अधिक गतिविधि वाले इन क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों पर पक्षीजनित फॉल्ट, लाइन ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन की संभावना बनी रहती है। इसे कम करने के लिए एमपी ट्रांसको ने ऐसे ट्रांसमिशन कॉरिडोरों में सुरक्षा उपकरण लगाने का काम प्राथमिकता से शुरू किया है।

कंपनी के अनुसार नदियों, जलाशयों, वन क्षेत्रों और पक्षियों के प्रमुख उड़ान मार्गों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों को इस काम में प्राथमिकता दी जा रही है।

कैसे काम करते हैं बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर

बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर उच्च दृश्यता वाले उपकरण होते हैं, जिन्हें ट्रांसमिशन लाइनों के ओपीजीडब्ल्यू (OPGW) या शील्ड वायर पर लगाया जाता है। इनका उद्देश्य पक्षियों को दूर से ही विद्युत लाइन की मौजूदगी का संकेत देना है, जिससे उनके लाइन से टकराने की आशंका कम हो सके।

वहीं बर्ड गार्ड और बर्ड प्रिवेंटर को टावरों, इंसुलेटर स्ट्रिंग और अन्य संवेदनशील विद्युत संरचनाओं पर लगाया जा रहा है। इन उपकरणों से पक्षियों के विद्युत संरचनाओं के सीधे संपर्क की संभावना कम करने में मदद मिलती है।

पक्षियों की बीट से भी हो सकता है विद्युत व्यवधान

नदी, जलाशय और वन क्षेत्रों में पक्षियों के बड़ी संख्या में बैठने के कारण ट्रांसमिशन लाइन के इंसुलेटरों पर उनकी बीट जमा हो सकती है। बारिश या अधिक नमी की स्थिति में इससे विद्युत चालकता बढ़ने का खतरा रहता है।

ऐसी स्थिति में फ्लैशओवर, लीकेज करंट, अर्थ फॉल्ट और लाइन ट्रिपिंग जैसी तकनीकी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। एमपी ट्रांसको के अनुसार बर्ड गार्ड, बर्ड प्रिवेंटर और बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर इन जोखिमों को कम करने में मदद कर रहे हैं।

ट्रांसमिशन नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर

एमपी ट्रांसको के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, जिन ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों पर ये उपकरण लगाए गए हैं, वहां पक्षीजनित व्यवधान और ब्रेकडाउन की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।

कंपनी का कहना है कि इससे ट्रांसमिशन लाइनों की उपलब्धता और ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल रही है। साथ ही निर्बाध विद्युत पारेषण व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ बिजली व्यवस्था मजबूत करने की पहल

एमपी ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने कहा कि कंपनी विद्युत पारेषण प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के लिए भी प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि पक्षी सुरक्षा उपकरणों की स्थापना से पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क की परिचालन दक्षता और स्थिरता में भी सुधार हो रहा है।

आगे भी लगाए जाएंगे उपकरण

एमपी ट्रांसको आगामी चरणों में पेंच क्षेत्र, बैनगंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों और अन्य पक्षी संवेदनशील ट्रांसमिशन कॉरिडोरों में यह काम जारी रखेगा।

इन क्षेत्रों से गुजरने वाली 132 केवी, 220 केवी और 400 केवी ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों पर बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर, बर्ड गार्ड और बर्ड प्रिवेंटर स्थापित किए जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *