उफान पर कुकड़ीखापा वॉटरफॉल, 150 फीट नीचे चट्टान पर फंसे नागपुर के 4 दोस्त; 3 घंटे चला रेस्क्यू

छिंदवाड़ा। डिजिटल डेस्क

मोहखेड़ के कुकड़ीखापा वॉटरफॉल में रविवार को तेज बारिश के बीच नागपुर के चार युवक करीब 150 फीट नीचे उतरकर चट्टान पर फंस गए। झरने का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम ने करीब तीन घंटे की मशक्कत कर चारों को सुरक्षित बाहर निकाला।

तेज बारिश के बाद बढ़ा पानी, चट्टान पर फंसे युवक

पुलिस के मुताबिक, महाराष्ट्र के नागपुर के नंदनवन निवासी चार दोस्त रविवार को पिकनिक मनाने कुकड़ीखापा वॉटरफॉल पहुंचे थे। उमरानाला चौकी प्रभारी राजेश साहू ने बताया कि 25 वर्षीय श्याम पिता केशव बोरकर, 22 वर्षीय अथर्व पिता आनंदराव उके, 25 वर्षीय मनीष पिता रामेश्वर उईके और 23 वर्षीय सतीश पिता श्रवण बावने झरने के नीचे करीब 150 फीट गहराई तक उतर गए थे।

बताया गया कि वॉटरफॉल के नीचे उतरने पर प्रतिबंध था। इसी दौरान क्षेत्र में तेज बारिश शुरू हो गई और झरने का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। पानी का बहाव बढ़ने पर चारों युवक नीचे एक चट्टान पर फंस गए और वापस ऊपर नहीं आ सके।

रस्सियों के सहारे 150 फीट नीचे उतरी टीम

युवकों के फंसने की सूचना मिलने के बाद पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टीम प्रभारी गणेश धुर्वे के मुताबिक, रेस्क्यू के दौरान लगातार तेज बारिश हो रही थी और चट्टानें भी काफी फिसलन भरी थीं।

टीम के सदस्यों ने रस्सियों की मदद से करीब 150 फीट गहराई में उतरकर युवकों तक पहुंच बनाई। दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन शाम 5.30 बजे तक चला। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद चारों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

रेस्क्यू टीम में ये जवान रहे शामिल

रेस्क्यू ऑपरेशन में कंपनी कमांडर गणेश धुर्वे के साथ सैनिक राजा मर्सकोले, स्पर्श यादव, प्रवीण धुर्वे, सुमित शर्मा, दीपेन्द्र बरकड़े, अजय धुर्वे और सचिन विश्वकर्मा शामिल रहे। इस दौरान मोहखेड़ टीआई संजय भलावी सहित उमरानाला चौकी और मोहखेड़ थाने के पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद रहे।

प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से बढ़ा जोखिम

कुकड़ीखापा वॉटरफॉल में बारिश के दौरान पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, चारों युवक प्रतिबंध के बावजूद झरने के नीचे गए थे। तेज बारिश के बाद पानी बढ़ने से वे चट्टान पर फंस गए। घटना के बाद एक बार फिर बारिश के दौरान वॉटरफॉल और जलप्रपातों के प्रतिबंधित हिस्सों में नहीं जाने की जरूरत सामने आई है।

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