मुरैना। डिजिटल डेस्क
बारिश के बाद सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से कैलारस तहसील के ग्राम मकूंदा का रपटा पानी में डूब गया। रास्ता बंद होने पर घायल महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने खाट को स्ट्रेचर बनाया और उसे ट्यूब के सहारे बांधकर उफनती नदी पार कराई।
गिरने से घायल हुई थीं कोकिला कुशवाहा
ग्राम मकूंदा निवासी कोकिला कुशवाहा रात में गिरने से घायल हो गई थीं। उनकी हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें इलाज के लिए कैलारस अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन बारिश के कारण सोन नदी का जलस्तर बढ़ गया था। नदी पर बना रपटा पूरी तरह पानी में डूब चुका था, जिससे गांव से बाहर निकलने का रास्ता बाधित हो गया।
ऐसे में ग्रामीणों ने महिला को अस्पताल पहुंचाने का इंतजाम खुद किया। उन्होंने खाट को स्ट्रेचर की तरह इस्तेमाल किया और उसे ट्यूब के सहारे बांध दिया। इसके बाद कई ग्रामीण महिला को खाट पर लेकर तेज बहाव वाली सोन नदी को पार करते हुए दूसरी तरफ पहुंचे। वहां से महिला को कैलारस अस्पताल ले जाया गया।
बेटे ने बताई मजबूरी
घायल महिला के बेटे बंटी कुशवाहा ने बताया कि उनकी मां रात में गिर गई थीं और इलाज के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था। लेकिन नदी में पानी अधिक होने के कारण सामान्य रास्ता बंद था। ऐसे में मजबूरी में ट्यूब के सहारे नदी पार करानी पड़ी।
बारिश में मरीजों और बच्चों की बढ़ती परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दौरान सोन नदी का जलस्तर बढ़ते ही मकूंदा और आसपास के गांवों में आवागमन की समस्या गंभीर हो जाती है। सबसे अधिक परेशानी मरीजों और स्कूली बच्चों को होती है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है, जबकि रपटा डूबने पर बच्चों का स्कूल जाना भी प्रभावित होता है।
महिला के नाती ऊदल कुशवाहा ने बताया कि रपटा डूबने के बाद बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। रोजमर्रा के काम के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों को भी नदी के पानी का सामना करना पड़ता है।
अगस्त 2025 में भी सामने आई थी ऐसी स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि अगस्त 2025 में भी सोन नदी का रपटा डूब गया था। उस दौरान भी लोगों को जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ी थी। ग्रामीणों के मुताबिक, उस समय भी स्थायी समाधान की जरूरत सामने आई थी, लेकिन करीब एक साल बाद भी समस्या बनी हुई है।
अब ग्रामीण रपटा की जगह सोन नदी पर स्थायी पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने पर गांव का संपर्क बाधित हो जाता है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने जैसी आपात स्थिति में मुश्किलें बढ़ जाती हैं।