सिंगरौली। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश की पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री राधा सिंह को साइबर ठगों ने निशाना बनाने का प्रयास किया। एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को कुरियर डिलीवरी ब्वॉय बताकर उन्हें फोन किया और ओटीपी हासिल करने की कोशिश की।
बताया गया कि इसी दौरान साइबर ठग ने राज्यमंत्री के मोबाइल फोन तक पहुंच बना ली। इसके बाद फोन में सेव अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और परिचितों को मैसेज भेजकर रुपयों की मांग की गई।
राज्यमंत्री को जैसे ही संदेह हुआ, उन्होंने स्टाफ से चर्चा की और मामले की जानकारी पुलिस को दी। इसके साथ ही जिन लोगों को मैसेज भेजे गए थे, उन्हें भी सतर्क किया गया। इससे ठग रुपये हासिल करने में सफल नहीं हो सके।
कुरियर डिलीवरी ब्वॉय बनकर किया फोन
जानकारी के मुताबिक राज्यमंत्री राधा सिंह के मोबाइल पर अज्ञात नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को कुरियर डिलीवरी ब्वॉय बताया और बातचीत के दौरान ओटीपी हासिल करने का प्रयास किया।
राज्यमंत्री को बातचीत पर संदेह हुआ। उन्होंने अपने स्टाफ से चर्चा की तो साइबर ठगी के प्रयास की आशंका हुई। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
अधिकारियों और मंत्रियों को भेजे रुपये मांगने के मैसेज
मोबाइल तक पहुंच बनाने के बाद साइबर ठगों ने फोनबुक में मौजूद नंबरों पर मैसेज भेजे। इन मैसेज में आर्थिक मदद के नाम पर रुपये भेजने की मांग की गई।
राज्यमंत्री के मोबाइल में कई आईएएस, आईपीएस अधिकारियों, प्रदेश के मंत्रियों और अन्य प्रतिष्ठित लोगों के नंबर सेव थे। इन लोगों को जब रुपये मांगने का मैसेज मिला तो कई लोगों ने राज्यमंत्री को फोन कर इसकी पुष्टि की।
इसके बाद स्पष्ट हुआ कि मैसेज राज्यमंत्री की ओर से नहीं भेजे गए थे।
सिंगरौली से भोपाल तक पहुंचा मामला
राज्यमंत्री के मोबाइल में सेव कई वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक मैसेज पहुंचने के बाद मामला सिंगरौली से लेकर भोपाल तक चर्चा में आ गया।
जिन लोगों को मैसेज मिले, उन्होंने फोन कर राज्यमंत्री से संपर्क किया। इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनका मोबाइल साइबर ठगों की पहुंच में आ गया था और उनके नाम से मैसेज भेजे गए हैं।
पुलिस कर रही साइबर ठग की तलाश
राज्यमंत्री राधा सिंह की ओर से मामले की शिकायत पुलिस से की गई है। शिकायत के बाद पुलिस साइबर ठग तक पहुंचने के लिए जांच कर रही है।
राज्यमंत्री के मुताबिक शुरुआत में उन्हें अनजान नंबर से आया फोन सामान्य लगा था, लेकिन बातचीत के दौरान संदेह होने पर उन्होंने स्टाफ से चर्चा की। इसके बाद साइबर ठगी के प्रयास का पता चला।
मामले में पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मोबाइल तक साइबर ठगों की पहुंच किस तरीके से बनी और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।