सतना। डिजिटल डेस्क
नागौद विधानसभा से तीन बार विधायक रहे रामप्रताप सिंह का सोमवार शाम निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर रिसर्च सेंटर में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही सतना जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों के अनुसार उनकी पार्थिव देह मंगलवार सुबह सतना पहुंचने की उम्मीद है। रामप्रताप सिंह लंबे समय से नर्मदा जल को सतना लाने के लिए आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने नर्मदा जल लाओ संघर्ष समिति के माध्यम से इस मुद्दे को लगातार उठाया।
रामप्रताप सिंह का जन्म 3 अक्टूबर 1946 को हुआ था। उपलब्ध जन्मतिथि के अनुसार वे 80वें वर्ष में थे। उनका राजनीतिक और सामाजिक जीवन लंबे समय तक नागौद क्षेत्र से जुड़ा रहा।
दो बार कांग्रेस से विधायक, तीसरी बार निर्दलीय जीते
रामप्रताप सिंह 1985 और 1990 में कांग्रेस के टिकट पर नागौद विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद 1998 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
1998 के चुनाव में उन्होंने झोपड़ी चुनाव चिन्ह पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नागौद राजपरिवार के रामदेव सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम त्रिपाठी को हराया था।
बताया जाता है कि टिकट कटने के बाद उनके धवारी स्थित आवास पर क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। लोगों ने उनसे निर्दलीय चुनाव लड़ने का आग्रह किया था।
अंतर्देशीय कार्ड भेजकर जनता से मांगी थी राय
1998 के चुनाव से पहले रामप्रताप सिंह ने क्षेत्र के लोगों से उनकी राय जानने का अनोखा तरीका अपनाया था। उन्होंने अंतर्देशीय कार्ड के जरिए लोगों से पूछा था कि क्या उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहिए।
परिवार और उनके करीबियों के अनुसार क्षेत्र से बड़ी संख्या में जवाब उनके पास पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया।
राजनीतिक जीवन में विधायक रहने के अलावा वे दो बार जनपद अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष और अपेक्स बैंक के संचालक समेत कई पदों पर रहे।
नर्मदा जल के लिए लगातार उठाते रहे आवाज
रामप्रताप सिंह के सार्वजनिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा सतना में नर्मदा जल लाने के आंदोलन से जुड़ा रहा। उन्होंने नर्मदा जल लाओ संघर्ष समिति का गठन कर बरगी परियोजना और सतना के हिस्से के पानी को लेकर कई बार आंदोलन किए।
2023 में भी उन्होंने बरगी नहर परियोजना को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उस समय उन्होंने सतना के किसानों को उनके हिस्से का पानी दिलाने की मांग उठाई थी।
नर्मदा जल आंदोलन से जुड़े पुराने दस्तावेजों में भी रामप्रताप सिंह को संघर्ष समिति के संयोजक के तौर पर सरकार से सतना के हिस्से का पानी दिलाने की मांग करते हुए दर्ज किया गया है।
अधूरा रह गया सतना में नर्मदा जल लाने का सपना
रामप्रताप सिंह ने विधायक रहने के दौरान और बाद में भी सतना में नर्मदा जल लाने की मांग को लगातार उठाया। इसके लिए उन्होंने जनसभाओं, महापंचायतों और आंदोलनों के जरिए सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा।
उनके निधन के साथ सतना में नर्मदा जल लाने के आंदोलन से जुड़ा उनका लंबा संघर्ष भी एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।