सतना। डिजिटल डेस्क
महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर सतना सेंट्रल जेल से आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे 7 बंदियों को रिहाई मिली। जेल मुख्यालय के आदेश और राज्य शासन की ओर से घोषित परिहार का लाभ मिलने के बाद इन बंदियों ने 2 अक्टूबर को जेल से बाहर कदम रखा। इनमें दो बंदी ऐसे हैं, जिन्होंने जेल में काम करते हुए एक-एक लाख रुपये से अधिक का पारिश्रमिक अर्जित किया है।
जेल अधीक्षक लीना कोष्टा के अनुसार, अच्छे व्यवहार के चलते सजा में छूट पाने वाले इन बंदियों को रिहाई के बाद मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिला है। रिहा होने वालों में मुन्नू पुत्र दशईया कुम्हार और उनके भाई गिरधारी कुम्हार, निवासी देवरी-ककरहटी, लाल उर्फ विरोचन पुत्र शंभू लोधी, निवासी मड़इयन-गुनौर, लोकेन्द्र सिंह पुत्र पूरन सिंह बुंदेला, निवासी नैगवां-गुनौर, शहनाज खान पुत्री मान खां, निवासी रैपुरा जिला पन्ना, धर्मेन्द्र उर्फ धरमू पुत्र बाबूराम मिश्रा, निवासी बलकौरा जिला छतरपुर और संतोष चौधरी पुत्र नर्वदा प्रसाद, निवासी चौधरी मोहल्ला-अमदरा जिला मैहर शामिल हैं।
जेल में काम कर दो बंदियों ने कमाए एक लाख से ज्यादा
रिहा हुए बंदियों में संतोष चौधरी ने जेल में काम करते हुए 1 लाख 11 हजार 972 रुपये का पारिश्रमिक अर्जित किया। वहीं लोकेन्द्र सिंह को जेल में काम करने के बदले 1 लाख 11 हजार 524 रुपये मिले। इस तरह दोनों बंदी एक लाख रुपये से अधिक का पारिश्रमिक लेकर जेल से बाहर निकले।
अन्य बंदियों में धर्मेन्द्र मिश्रा को 63 हजार 781 रुपये, लाल उर्फ विरोचन को 56 हजार 197 रुपये, शहनाज को 52 हजार 382 रुपये, मुन्नू को 36 हजार 918 रुपये और गिरधारी को 21 हजार 373 रुपये पारिश्रमिक के रूप में प्राप्त हुए।
4 बंदी खुली जेल में भुगत रहे थे सजा
रिहा किए गए 7 बंदियों में से 4 बंदी खुली जेल में सजा भुगत रहे थे। अच्छे व्यवहार और जेल में उपलब्ध व्यवस्था के तहत काम करते हुए इन बंदियों ने पारिश्रमिक भी अर्जित किया।
गीता और फलदार पौधे देकर विदाई
रिहाई के मौके पर जेल प्रशासन की ओर से सभी बंदियों को श्रीफल, श्रीमद्भगवद्गीता, फलदार पौधा, लंच पैकेट, बंदी पारिश्रमिक पासबुक और रिहाई प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
इस दौरान उपजेल अधीक्षक सोनवीर सिंह कुशवाह, कल्याण अधिकारी अनिरुद्ध कुमार तिवारी, सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा सिंह और अनिल प्रताप सिंह सहित जेल के कर्मचारी मौजूद रहे।