5 किमी लंबा वाटर चैनल तैरकर पुरैना पहुंचा था किसान की जान लेने वाला हाथी, अब हिनौता में डेरा; रेस्क्यू की तैयारी

सतना। डिजिटल डेस्क

सतना के अमरपाटन वन क्षेत्र के सिंहपुर-मौहारी में 50 वर्षीय किसान कंछेदी यादव की जान लेने वाला जंगली हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से मैहर वन मंडल के पुरैना तक पहुंचने के लिए बाणसागर डैम का करीब 5 किलोमीटर लंबा वाटर चैनल तैरकर पार कर चुका है। फिलहाल हाथी की लोकेशन गोरसरी घाटी के हिनौता में मिली है, जिसके बाद मैहर, मुकुंदपुर और अमरपाटन वन अमला अलर्ट पर है।

कॉलर आईडी से लगातार ट्रैक किया जा रहा हाथी

मैहर डीएफओ विद्या भूषण मिश्रा के मुताबिक हाथी के शरीर पर कॉलर आईडी लगी हुई है, जिसके चलते बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है।

फिलहाल हाथी की लोकेशन गोरसरी घाटी के हिनौता में मिली है। इसके बाद वन विभाग ने क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बढ़ा दी है। एसडीओ सिद्धार्थ दीपांकर और रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी के निर्देशन में मैहर, मुकुंदपुर और अमरपाटन रेंज की टीमें हाथी की लगातार निगरानी कर रही हैं।

बांधवगढ़ से पुरैना तक ऐसे पहुंचा हाथी

वन विभाग के मुताबिक यह हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकलकर मैहर वन मंडल के पुरैना क्षेत्र में पहुंचा था। इस दौरान उसने बाणसागर डैम के करीब 5 किलोमीटर लंबे वाटर चैनल को तैरकर पार किया।

इसके बाद हाथी ने मैहर वन मंडल के अलग-अलग वन क्षेत्रों में मूवमेंट किया। अमरपाटन वन क्षेत्र के सिंहपुर-मौहारी में पहुंचने के दौरान उसके हमले में किसान कंछेदी यादव की मौत हो गई।

किसान की मौत के बाद वन विभाग ने हाथी की गतिविधियों पर निगरानी और तेज कर दी है।

रेस्क्यू के लिए बांधवगढ़ से पहुंची 10 सदस्यीय टीम

हाथी को सुरक्षित तरीके से वापस बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ले जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की टीम मंगलवार को मैहर पहुंची।

इस टीम में डीएफओ युहान कटारा, एसडीओ दिलीप मराठा और रेंजर अंकित सोनी समेत कुल 10 सदस्य शामिल हैं।

वन अधिकारियों के मुताबिक हाथी को ट्रेंक्युलाइज कर रेस्क्यू करने के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लिया जा रहा है। रेस्क्यू के दौरान हाथी और आसपास के लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

हाथियों का नेचुरल कॉरिडोर माना जा रहा इलाका

वन अधिकारियों का मानना है कि यह इलाका हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर का हिस्सा है। इसी वजह से पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही बढ़ी है।

वन विभाग के मुताबिक वर्ष 2024 से अब तक पांचवीं बार मैहर वन मंडल के अमरपाटन वन क्षेत्र में हाथियों का मूवमेंट देखा गया है।

वर्ष 2024 में यहां दो नर और एक मादा हाथी देखे गए थे। इनमें से एक हाथी की मुकुंदपुर के सरिया बीट में करंट लगने से मौत हो गई थी।

किसान के परिवार को 8 लाख की सहायता मंजूर

हाथी के हमले में जान गंवाने वाले किसान कंछेदी यादव के आश्रितों के लिए वन विभाग ने 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है।

मैहर डीएफओ के मुताबिक परिजनों को तत्काल राहत के तौर पर 50 हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष सहायता राशि नियमानुसार उपलब्ध कराई जाएगी।

फसल और कच्चे मकान को नुकसान पर भी मिलेगी सहायता

वन विभाग ने ग्रामीणों को हाथी से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि हाथी खेतों में पहुंचता है तो उसे भगाने के लिए उसके नजदीक जाने की कोशिश न करें।

हाथी के कारण फसल को नुकसान होने पर राजस्व विभाग द्वारा नुकसान का आकलन किया जाएगा और आरबीसी के प्रावधानों के तहत सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा।

इसी तरह हाथी से कच्चे मकानों को नुकसान होने की स्थिति में भी नियमानुसार क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करने की बात वन विभाग ने कही है।

वन विभाग ने ग्रामीणों को किया अलर्ट

हाथी की मौजूदा लोकेशन को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। मैहर, मुकुंदपुर और अमरपाटन रेंज की टीमें उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

फिलहाल वन विभाग का फोकस हाथी को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पहुंचाने पर है। इसके साथ ही ग्रामीणों को हाथी से दूरी बनाए रखने और उसकी मौजूदगी की सूचना तत्काल वन अमले को देने की सलाह दी जा रही है।

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