दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महाशक्तियों के बीच गहराते अविश्वास के माहौल में परमाणु हथियारों को लेकर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ‘सिपरी ईयरबुक 2026’ के अनुसार भारत ने अपने परमाणु हथियारों के भंडार में वृद्धि की है, जबकि पाकिस्तान का जखीरा पिछले आकलन के मुकाबले स्थिर बना हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास अब अनुमानित 190 परमाणु हथियार हैं। पिछले वर्ष यह संख्या 180 के आसपास आंकी गई थी। दूसरी ओर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की संख्या लगभग 170 पर स्थिर बताई गई है। इससे दक्षिण एशिया में परमाणु क्षमता के मामले में भारत की बढ़त और स्पष्ट हो गई है।
रूस और अमेरिका अब भी शीर्ष पर
वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों के मामले में रूस और अमेरिका का दबदबा कायम है। SIPRI के अनुसार दुनिया में कुल 12,187 परमाणु हथियार मौजूद हैं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा रूस और अमेरिका के पास है। हालांकि शीत युद्ध के बाद हथियारों में कमी लाने के प्रयास हुए थे, लेकिन अब कई देश अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण पर तेजी से काम कर रहे हैं।
चीन भी तेजी से बढ़ा रहा क्षमता
रिपोर्ट में चीन के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती परमाणु शक्ति बनकर उभर रहा है। यही वजह है कि एशिया में सामरिक संतुलन लगातार बदल रहा है और भारत समेत कई देश अपनी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
केवल संख्या नहीं, तकनीक भी अहम
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक परमाणु शक्ति का आकलन केवल हथियारों की संख्या से नहीं किया जाता। मिसाइलों की मारक क्षमता, लॉन्चिंग सिस्टम, समुद्री प्रतिरोधक क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। भारत हाल के वर्षों में भूमि, वायु और समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
SIPRI की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और सैन्य तनाव जारी हैं। यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व की अस्थिरता और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने परमाणु हथियारों की भूमिका को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर हथियार नियंत्रण की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में परमाणु होड़ और तेज हो सकती है।