8 बैगा बच्चों की मौत के बाद जागा प्रशासन, अब राशन-पानी पर भी फोकस

बालाघाट।

बिरसा क्षेत्र के बैगा बहुल गांवों में बीमारी का असर सामने आने के बाद प्रशासन ने अब स्वास्थ्य सेवाओं के साथ परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी निगरानी बढ़ा दी है। इलाज, पोषण, राशन, पेयजल और स्वच्छता को एक साथ जोड़कर अभियान चलाया जा रहा है।

15 अगस्त को प्रभारी मंत्री ने अस्पताल में जाना हाल

मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री तथा बालाघाट के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्वतंत्रता दिवस पर जिला अस्पताल पहुंचकर बीमारी प्रभावित गांवों से भर्ती बच्चों का हाल जाना।

उन्होंने बच्चों के परिजनों से बातचीत कर अस्पताल में मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। चिकित्सकों से भी बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी ली गई।

प्रभारी मंत्री ने भर्ती बच्चों की विशेष निगरानी रखने और उपचार के साथ उनके परिजनों की जरूरी सुविधाओं में कमी नहीं होने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को शासन और प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। बीमारी की रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों को समन्वय से काम करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस दौरान सांसद भारती पारधी, विधायक गौरव सिंह पारधी, पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य मौसम बिसेन, पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे, कलेक्टर कुमार सत्यम और पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

152 मरीज अस्पताल पहुंचे, 100 स्वस्थ होकर लौटे

प्रशासन के अनुसार पिछले एक महीने में प्रभावित गांवों से 152 मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें 100 मरीज स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज किए जा चुके हैं।

फिलहाल 52 मरीजों का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। 15 अगस्त को भी एहतियात के तौर पर सात मरीजों को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।

अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

2,780 लोगों की जांच, 236 में मिला मलेरिया

स्वास्थ्य विभाग की 20 सर्वेक्षण टीमें कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका, घुम्मुर, अडोरी, मछुरदा, गठिया और मातला सहित प्रभावित गांवों में घर-घर पहुंचकर जांच कर रही हैं।

अब तक 2,780 लोगों की जांच की गई है। इनमें 236 मलेरिया, 116 दस्त, 160 चर्मरोग और 101 दानों के साथ बुखार के मरीज चिन्हित किए गए हैं।

सर्वेक्षण के दौरान कुल 613 मरीज चिन्हित किए गए, जिनमें 461 का उपचार घर पर किया गया। उपचार व्यवस्था के लिए 10 चिकित्सा अधिकारी, चार एंबुलेंस और चार पीएम जनमन एएनएमएमयू तैनात हैं।

बीमारी के बीच परिवारों को राशन की भी चिंता नहीं

प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की खाद्य जरूरतों को भी अभियान में शामिल किया है। पात्र परिवारों को दो माह का राशन एकमुश्त उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि बीमारी के दौरान खाद्यान्न के लिए उन्हें परेशानी न उठानी पड़े।

15 अगस्त को जिला आपूर्ति अधिकारी संत कुमार भलावी ने बोंदारी पहुंचकर अपनी मौजूदगी में पात्र बैगा परिवारों को राशन वितरण कराया।

कोरका में ‘राशन आपके ग्राम’ योजना के तहत वितरण व्यवस्था का निरीक्षण किया गया। धर्मशाला के परिवारों ने बताया कि उन्हें 6 अगस्त को दो माह का राशन मिल चुका है। मछुरदा में भी 8 अगस्त को दो माह की राशन सामग्री वितरित की गई थी।

कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका, गठिया, घुम्मुर, धर्मशाला और मछुरदा सहित प्रभावित गांवों में राशन वितरण की निगरानी की जा रही है।

बच्चों के पोषण पर भी विशेष निगरानी

स्वास्थ्य टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों के पोषण और जरूरी दवाओं पर भी ध्यान दिया है। 642 बच्चों को विटामिन-ए, ओआरएस और जिंक की खुराक दी गई।

इसके अलावा 583 बच्चों को आयरन सिरप, 501 को एल्बेंडाजोल और 59 बच्चों को मीजल्स का डोज लगाया गया।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रभावित गांवों की आंगनबाड़ियों में सफाई कराई है। बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने के साथ जरूरत के अनुसार घर तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई।

बैहर के 20 और बिरसा के 33 आंगनबाड़ी केंद्रों में सफाई कराई गई है।

पेयजल स्रोतों का क्लोरीनीकरण, हैंडपंपों की सफाई

बीमारी की रोकथाम के लिए पेयजल व्यवस्था को भी निगरानी में रखा गया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने प्रभावित गांवों के हैंडपंप और अन्य पेयजल स्रोतों का क्लोरीनीकरण शुरू किया है।

जल स्रोतों के आसपास सफाई और जल निकासी की व्यवस्था कराई जा रही है। बैहर के दो और बिरसा के एक गांव से जल स्रोतों के नमूने भी लिए गए हैं।

बिरसा के एक गांव में खराब हैंडपंप की मरम्मत कराई गई। बिरसा क्षेत्र में 24 हैंडपंपों के आसपास सफाई, दो नालियों और दो सड़क मार्गों पर जमा कीचड़ हटाने की कार्रवाई भी की गई।

मच्छरों की रोकथाम के लिए लार्वा सर्वे और फॉगिंग

मलेरिया की स्थिति को देखते हुए मच्छरों की रोकथाम के उपाय भी किए जा रहे हैं। आठ गांवों में लार्वा सर्वे, सात गांवों में स्प्रे और दो गांवों में फॉगिंग कराई गई है।

स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन का फोकस बीमारी के इलाज के साथ उन परिस्थितियों को नियंत्रित करने पर है, जो संक्रमण फैलने का कारण बन सकती हैं।

पशुओं की भी जांच, संक्रमण के लक्षण नहीं मिले

संभावित जूनोटिक बीमारी की आशंका को देखते हुए पशुपालन विभाग की टीमों ने कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका, गठिया और घुम्मुर में पशुओं की जांच की।

जांच के दौरान पशुओं में किसी संक्रामक बीमारी के लक्षण नहीं मिले। एहतियात के तौर पर नमूने लिए गए हैं, जिन्हें परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।

छात्रावासों और स्कूलों में भी निगरानी

जनजातीय कार्य विभाग ने बैहर के 13 और बिरसा के 11 छात्रावास एवं आश्रमों में साफ-सफाई और पानी की टंकियों की सफाई कराई है। विद्यार्थियों को मच्छरदानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।

स्कूल और आंगनबाड़ी से अनुपस्थित बच्चों की स्थिति पर स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, जनजातीय कार्य तथा शिक्षा विभाग की संयुक्त टीमें नजर रख रही हैं।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सर्राफ ने प्रभावित गांवों, स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनबाड़ियों, छात्रावासों और अन्य कार्यस्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

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