उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला परिक्षेत्र अंतर्गत मझखेता बीट में मानसूनी गश्ती के दौरान वन अमले को बाघ की अस्थियां और कंकाल मिला। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर जांच शुरू कराई। क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डॉग स्क्वॉड से सर्च कराया गया। साथ ही मेटल डिटेक्टर की मदद से भी क्षेत्र की जांच की गई, ताकि किसी प्रकार के फंदे, हथियार या अन्य संदिग्ध साक्ष्य का पता लगाया जा सके।
प्रथम दृष्टया बाघ का कंकाल होने की संभावना
वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा मौके पर निरीक्षण के बाद प्रथम दृष्टया इसे बाघ का कंकाल माना गया। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्धारित दिशा-निर्देशों और मानक प्रोटोकॉल के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की गई। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व तथा सहायक पशु चिकित्सा शल्यज्ञ, ताला ने कंकाल का विधिवत परीक्षण किया।
सैंपल एकत्र कर किया गया दस्तावेजीकरण
वन विभाग ने बाघ की प्रजाति और लिंग की पुष्टि के लिए आवश्यक जैविक नमूने (सैंपल) एकत्र किए। साथ ही पूरे घटनाक्रम का दस्तावेजीकरण और साक्ष्य संकलन किया गया। वन विभाग के अनुसार जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद NTCA के मानकों के अनुरूप कंकाल का अग्नि दहन (विनष्टीकरण) किया गया। फिलहाल वन विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि बाघ की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई। प्रजाति, लिंग और अन्य वैज्ञानिक तथ्यों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। जांच पूरी होने तक वन विभाग ने मामले पर किसी भी तरह की अटकलों से बचने की अपील की है।