BRICS में बड़ा फैसला: ऊर्जा सुरक्षा से लेकर डॉलर के विकल्प तक, नई दिल्ली घोषणा में क्या-क्या

नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क

भारत की मेजबानी में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के पहले दिन सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। करीब 140 बिंदुओं वाले इस दस्तावेज में ऊर्जा सुरक्षा, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, सीमा-पार भुगतान, वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार, AI और ग्लोबल साउथ की भूमिका समेत कई अहम मुद्दों पर साझा रुख सामने आया।

डॉलर के विकल्प की दिशा में स्थानीय मुद्राओं पर जोर

नई दिल्ली घोषणा में BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश के निपटान को बढ़ावा देने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति बनी है। BRICS Payment Task Force अलग-अलग देशों के भुगतान और मैसेजिंग सिस्टम के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की संभावनाओं पर काम कर रहा है।

घोषणा में सीमा-पार भुगतान को तेज, कम लागत वाला, ज्यादा सुलभ, कुशल, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर दिया गया है।

हालांकि, इसे नई BRICS मुद्रा के फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल BRICS में किसी साझा मुद्रा का प्रस्ताव नहीं है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेनदेन की लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा पर BRICS का बड़ा फोकस

नई दिल्ली घोषणा में ऊर्जा सुरक्षा को सामाजिक-आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद बताया गया है। BRICS देशों ने अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति, ऊर्जा बाजारों की स्थिरता और महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

घोषणा में यह भी माना गया है कि उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए वैश्विक ऊर्जा मिश्रण में फॉसिल फ्यूल्स की भूमिका अभी बनी रहेगी। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोजन, हाइड्रोपावर, ऊर्जा भंडारण और कम-कार्बन तकनीकों सहित अलग-अलग विकल्पों के इस्तेमाल को महत्व दिया गया है।

महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा

BRICS ने ऊर्जा से जुड़े क्रॉस-बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर समेत महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा और उसकी मजबूती बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी पहल का उल्लेख किया गया है।

ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर

घोषणा में BRICS ने वैश्विक संस्थानों में उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (EMDCs) तथा कम विकसित देशों की बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग दोहराई है।

संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार का समर्थन करते हुए BRICS ने वैश्विक आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप निर्णय लेने वाली संस्थाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात कही है।

AI को लेकर साझा एजेंडा

नई दिल्ली घोषणा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। BRICS ने ग्लोबल साउथ की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी और ऊर्जा-कुशल AI को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।

व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई दिशा

BRICS देशों ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने और व्यापार तथा निवेश को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। नई दिल्ली घोषणा में BRICS Economic Partnership 2030 की दिशा में भारत की अध्यक्षता के दौरान हुई प्रगति का भी स्वागत किया गया।

इसके साथ ही न्यू डेवलपमेंट बैंक से स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण बढ़ाने, फंडिंग के स्रोतों में विविधता लाने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने को लेकर भी प्रोत्साहित किया गया है।

एकतरफा कदमों और वैश्विक तनाव पर भी रुख

BRICS की नई दिल्ली घोषणा आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही। दस्तावेज में बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून और अधिक प्रतिनिधित्व वाली वैश्विक व्यवस्था के समर्थन के साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों पर भी समूह का रुख सामने आया है।

भारत के लिए क्या मायने

नई दिल्ली घोषणा में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, सीमा-पार भुगतान, ऊर्जा सुरक्षा, AI और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों पर सहमति भारत की कई प्राथमिकताओं से जुड़ती है।

खास तौर पर UPI जैसे डिजिटल भुगतान मॉडल और स्थानीय मुद्रा आधारित भुगतान व्यवस्था को आगे बढ़ाने से BRICS देशों के बीच कारोबार को आसान बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि साझा BRICS मुद्रा का फैसला फिलहाल एजेंडे में नहीं है।

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