CBSE के 40 करोड़ पन्नों की चेकिंग में बड़ी गड़बड़ी!

शिक्षा मंत्री बोले- हर शिकायत की होगी जांच, छात्रों को मिलेगा री-इवैल्युएशन का मौका

CBSE बोर्ड परीक्षा 2026 की कॉपियों की जांच को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने माना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में गड़बड़ियां सामने आई हैं और अगर किसी स्तर पर लापरवाही मिली तो दोषियों पर कार्रवाई होगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल करीब 17 लाख छात्रों की लगभग 40 करोड़ पन्नों वाली उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन जांच की गई थी। इसी दौरान कई छात्रों ने ब्लर कॉपी, अधूरी स्कैनिंग, बिना जांचे जवाब और पोर्टल क्रैश जैसी शिकायतें कीं।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि “मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं, समाधान निकाला जाएगा।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर छात्र की शिकायत पर विशेषज्ञों द्वारा जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर री-इवैल्युएशन कराया जाएगा।

छात्रों को क्या मिलेगा?

CBSE ने कहा है कि जिन छात्रों को अपनी कॉपी की जांच पर संदेह है, उन्हें री-इवैल्युएशन और वेरिफिकेशन का पूरा मौका दिया जाएगा। बोर्ड ने यह भी साफ किया कि किसी भी छात्र के साथ तकनीकी दिक्कतों की वजह से अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

फीस भी घटाई गई

विवाद बढ़ने के बाद CBSE ने री-इवैल्युएशन फीस में भी बड़ी कटौती की है। अब छात्रों को उत्तर पुस्तिका देखने के लिए 100 रुपये, मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए 100 रुपये और प्रति प्रश्न री-चेकिंग के लिए 25 रुपये देने होंगे। पहले यह फीस काफी ज्यादा थी।

IIT विशेषज्ञ करेंगे मदद

तकनीकी गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए सरकार ने IIT मद्रास और IIT कानपुर के विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्रालय चाहता है कि भविष्य में ऐसी परेशानी दोबारा न हो।

छात्रों में बढ़ी नाराजगी

सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने दावा किया कि उनकी कॉपियों के कुछ पन्ने स्कैन ही नहीं हुए या जवाब जांचे बिना नंबर दे दिए गए। इसी को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

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