चित्रकूट। डिजिटल डेस्क
मंदाकिनी की विनाशकारी बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब तबाही के निशान सामने आने लगे हैं। इस आपदा ने तटवर्ती इलाकों के साथ उन नाविक परिवारों की रोजी-रोटी पर भी गहरी चोट की है, जिनका जीवन पीढ़ियों से नदी और धार्मिक पर्यटन से जुड़ा रहा है।
पीढ़ियों से नाव ही रोजी-रोटी का सहारा
चित्रकूट में मंदाकिनी के घाटों पर नाव चलाना सिर्फ पर्यटकों को नदी की सैर कराने तक सीमित नहीं है। यह कई परिवारों की पीढ़ियों से चली आ रही आजीविका है। धार्मिक पर्यटन के चलते सालभर श्रद्धालु और पर्यटक चित्रकूट पहुंचते हैं।
नाविक इन्हें एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंचाने के साथ नदी की धारा और चित्रकूट के घाटों से परिचित कराने का काम भी करते हैं। ऐसे में मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ ने इस पूरी आजीविका व्यवस्था को प्रभावित किया है।
हाल की बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा और कई निचले इलाकों में पानी भर गया।
करीब 35 नावें बहने की जानकारी
स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक, बाढ़ के तेज बहाव में करीब 35 नावें बह गईं। इन नावों के सहारे परिवार चलाने वाले नाविकों के सामने अब सबसे बड़ी चिंता फिर से नाव तैयार कराने की है।
नाविकों के मुताबिक, एक मजबूत नाव तैयार कराने में करीब दो लाख रुपये तक खर्च हो सकता है। ऐसे में बाढ़ में नाव गंवाने के बाद इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके लिए आसान नहीं है।
नाव उनके लिए सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि उनकी दुकान, रोजगार और परिवार की आय का प्रमुख जरिया है। नाव चली जाने का सीधा मतलब कमाई का एक बड़ा साधन खत्म होना है।
बाढ़ के दौरान नदी का बहाव इतना तेज था कि कई नाविकों को अपनी नावें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का पर्याप्त मौका भी नहीं मिल पाया। हाल में एक नाविक के तेज धारा में बहने और NDRF द्वारा उसे सुरक्षित निकाले जाने की घटना भी सामने आई थी।
250 नावें किनारे, रोजगार पर ब्रेक
बाढ़ के बाद नदी किनारे करीब 250 नावों के थम जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें से कई नावें फिलहाल संचालन की स्थिति में नहीं हैं। नदी में जलस्तर और बहाव सामान्य होने तथा घाटों पर स्थिति पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही नाविकों की नियमित गतिविधियां बहाल हो पाएंगी।
चित्रकूट के लिए यह संकट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घाटों से जुड़ी नाव सेवा धार्मिक पर्यटन की स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। बाढ़ से घाट, दुकानें, घर और संपर्क मार्ग प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं।
नाविक परिवारों के सामने अब पुनर्वास का सवाल
मंदाकिनी का जलस्तर घटने के साथ प्रशासन का फोकस राहत और बचाव के साथ नुकसान के आकलन पर भी है। चित्रकूट प्रशासन ने प्रभावित गांवों में क्षति सर्वे और राहत वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जानकारी दी है।
ऐसे में नाविक परिवारों को उम्मीद है कि नावों को हुए नुकसान का भी सर्वे कराया जाएगा और पात्र प्रभावित नाविकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उनका कहना है कि यदि नावों के नुकसान की भरपाई के लिए मदद मिलती है तो वे दोबारा अपना रोजगार शुरू कर सकेंगे।