रीवा। डिजिटल डेस्क
विंध्य की पहाड़ियों के बीच बनी छुहिया घाटी की रेलवे सुरंग रीवा–चुरहट रेलखंड की सबसे महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग संरचनाओं में से एक है। लगभग 3.33 किलोमीटर लंबी यह सुरंग दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से रेल लाइन गुजारने में अहम भूमिका निभाती है। यह मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी रेल सुरंग है।
रीवा और सीधी जिलों की सीमा के आसपास स्थित छुहिया घाटी अपने पहाड़ी भूभाग के कारण रेलमार्ग निर्माण के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रही है। इस क्षेत्र में सुरंग का निर्माण ललितपुर–सिंगरौली नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत किया गया है।
24 अक्टूबर 2026 को रीवा–चुरहट रेलखंड के उद्घाटन के साथ इस रेलमार्ग को शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। 65 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड के विकास से रीवा और सीधी क्षेत्र के बीच रेल संपर्क को मजबूती मिली है।
इतनी लंबी है छुहिया घाटी की रेल सुरंग
छुहिया घाटी में बनी सुरंग की लंबाई लगभग 3,330 मीटर से अधिक है। रेल मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में इसकी लंबाई 3.33 किलोमीटर बताई गई है।
इस सुरंग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह रेल लाइन को पहाड़ी भूभाग के भीतर से निकालने में मदद करती है। ऐसे क्षेत्रों में रेलमार्ग विकसित करने के लिए जमीन की बनावट, चट्टानों की मजबूती, ढलान और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
सुरंग के निर्माण से रेल लाइन को पहाड़ी क्षेत्र के अनुरूप निर्धारित मार्ग पर ले जाना संभव हुआ। यह परियोजना विंध्य क्षेत्र में रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
गोविंदगढ़ और बघवार के बीच स्थित है सुरंग
यह रेलवे सुरंग रीवा–सीधी रेलखंड पर गोविंदगढ़ और बघवार के बीच स्थित है। गोविंदगढ़ रीवा जिले में है, जबकि बघवार सीधी जिले की ओर पड़ता है।
इस रेलखंड के निर्माण का उद्देश्य रीवा से चुरहट होते हुए सीधी क्षेत्र तक रेल संपर्क विकसित करना है। सुरंग इस मार्ग के पहाड़ी हिस्से को पार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि रेल लाइन चुरहट तक पहुंची है। इसका अर्थ यह नहीं है कि रेलमार्ग सीधी शहर तक पहुंच गया है। चुरहट सीधी जिले में स्थित है और इसी रेलखंड के माध्यम से जिले को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ा गया है।
सुरंग की निगरानी के लिए लगाए गए 200 CCTV कैमरे
छुहिया घाटी की 3.33 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग में सुरक्षा और निगरानी के लिए 200 CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की मदद से सुरंग के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखने और रेल परिचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
पहाड़ी क्षेत्र में रेल सुरंग बनाना क्यों चुनौतीपूर्ण
पहाड़ी इलाकों में रेल सुरंग का निर्माण सामान्य मैदानी रेलमार्ग की तुलना में अधिक तकनीकी तैयारी मांगता है। चट्टानों की प्रकृति, जमीन के भीतर की संरचना और पानी के रिसाव की संभावना जैसे कारकों का आकलन करना जरूरी होता है।
सुरंग की संरचना इस तरह तैयार करनी होती है कि उसके भीतर से गुजरने वाली रेल लाइन सुरक्षित बनी रहे। इसके लिए निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी उपाय अपनाने पड़ते हैं।
छुहिया घाटी की सुरंग विंध्य क्षेत्र के ऐसे ही दुर्गम भूभाग में रेल संपर्क विकसित करने का हिस्सा है। इसकी मदद से रीवा–चुरहट रेलखंड को पहाड़ी क्षेत्र से होकर आगे बढ़ाया गया है।
रीवा–चुरहट रेलखंड में सुरंग की अहम भूमिका
रीवा–चुरहट रेलखंड की कुल लंबाई 65 किलोमीटर है। इस मार्ग पर सुरंग के अलावा रेलवे पुलों सहित कई महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग संरचनाएं विकसित की गई हैं।
इस रेलखंड के शुरू होने से रीवा और सीधी क्षेत्र के बीच रेल संपर्क को विस्तार मिला है। यात्रियों को आवागमन का नया विकल्प मिलने के साथ भविष्य में माल परिवहन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
क्षेत्र में चूना पत्थर और अन्य खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में रेल संपर्क का विस्तार औद्योगिक गतिविधियों और माल ढुलाई के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
विंध्य के रेल विकास में महत्वपूर्ण उपलब्धि
छुहिया घाटी की 3.33 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग केवल एक निर्माण संरचना नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र में रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रीवा–चुरहट रेलखंड के साथ इसका महत्व और बढ़ गया है।
इस रेलखंड के शुरू होने से सीधी जिले को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ा गया है। आने वाले समय में रेल संपर्क का विस्तार विंध्य क्षेत्र में यात्री सुविधाओं, माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों के विकास में योगदान दे सकता है।
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