CJP आंदोलन से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक: 26 दिनों में कैसे बदला घटनाक्रम, जानिए पूरी टाइमलाइन

NEET-UG परीक्षा विवाद से शुरू हुआ छात्र आंदोलन कुछ ही हफ्तों में देश के सबसे बड़े युवा आंदोलनों में बदल गया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के बैनर तले शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ने पहले जंतर-मंतर पर अनशन, फिर देशव्यापी प्रदर्शन, सरकार से कई दौर की बातचीत और आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक का सफर तय किया। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की क्रमवार टाइमलाइन।

3 मई: NEET-UG परीक्षा और विवाद की शुरुआत

3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए। विवाद बढ़ने पर केंद्र सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया। साथ ही अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की घोषणा की गई।

जून: CJP ने आंदोलन की शुरुआत की

युवाओं के एक समूह ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नाम से आंदोलन शुरू किया। शुरुआत में यह सोशल मीडिया अभियान था, लेकिन जल्द ही हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। आंदोलन की प्रमुख मांगें थीं—

  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
  • परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार
  • पेपर लीक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
  • प्रभावित छात्रों को न्याय

आंदोलन धीरे-धीरे दिल्ली से निकलकर कई राज्यों तक पहुंच गया।

जंतर-मंतर बना आंदोलन का केंद्र

दिल्ली का जंतर-मंतर आंदोलन का मुख्य केंद्र बना। यहां हजारों छात्र और युवा लगातार धरने पर बैठे रहे। आंदोलन के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक प्रमुख चेहरे बनकर उभरे।

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सोनम वांगचुक का 26 दिन का अनशन

आंदोलन को नया मोड़ तब मिला जब सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया। उनका अनशन 26 दिन तक चला। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती गई, लेकिन उन्होंने आंदोलन जारी रखा। अनशन के कारण पूरे देश का ध्यान इस आंदोलन की ओर गया और कई शहरों में समर्थन प्रदर्शन शुरू हो गए।

देशभर में प्रदर्शन, संसद तक गूंज

जैसे-जैसे आंदोलन बढ़ा, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। संसद के मानसून सत्र में भी विपक्ष ने NEET विवाद और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा उठाया। कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं, जिससे आंदोलन और तेज हो गया।

सरकार और CJP के बीच कई दौर की बातचीत

बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार और CJP नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हुई। शुरुआती बैठकों में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, क्योंकि CJP अपनी प्रमुख मांग—धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे—पर अड़ा रहा। बाद में सरकार ने कुछ मांगों पर सहमति जताई, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों की समीक्षा और परीक्षा सुधारों पर चर्चा शामिल थी।

24 जुलाई: सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन

सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन समाप्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा सुधार, संसद में चर्चा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने जैसे बिंदुओं पर भरोसा दिलाया है। हालांकि CJP ने साफ किया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं।

25 जुलाई: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

लगातार बढ़ते राजनीतिक और जनदबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य राजनीतिक और कानूनी विवादों में नहीं उलझना चाहिए। उन्होंने लिखा कि उन्होंने पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और देशहित में पद छोड़ने का फैसला किया।

इस्तीफे के बाद भी आंदोलन जारी

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताया, लेकिन साथ ही कहा कि उनकी अन्य मांगें—परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को न्याय—अब भी पूरी नहीं हुई हैं। संगठन ने देशभर में कैंडल मार्च और आगे के आंदोलन का ऐलान भी किया।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता

  • धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा (अब पूरा)
  • परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार
  • पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय
  • प्रभावित छात्रों और परिवारों को राहत

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