कच्चा तेल 100 डॉलर के करीब पहुंचा, भारतीय शेयर बाजार पर दबाव; रुपया भी कमजोर

नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं। बुधवार को Brent crude 99 डॉलर प्रति बैरल के पार रहा। तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty दोनों में गिरावट दर्ज की गई।

Sensex और Nifty में गिरावट

बुधवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 0.83 फीसदी गिरकर 74,954.33 अंक पर आ गया, जबकि NSE Nifty 50 में 0.67 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,474.40 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट के बीच 16 प्रमुख सेक्टरों में से 12 में कमजोरी देखी गई। IT इंडेक्स करीब 3 फीसदी नीचे रहा।

बाद के शुरुआती कारोबार में भी बाजार पर दबाव बना रहा। एक रिपोर्ट के मुताबिक Sensex 600 अंकों से ज्यादा गिरकर 75,000 के नीचे चला गया, जबकि Nifty 23,500 के स्तर से नीचे कारोबार करता दिखा।

Brent crude 100 डॉलर के करीब क्यों पहुंचा

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव है। ईरान और अमेरिका से जुड़े संघर्ष के बीच क्षेत्र में हमले तेज हुए हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई शहरों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच भी हमले हुए हैं। इससे तेल की आपूर्ति और खासकर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बढ़ी है।

बुधवार को Brent crude futures करीब 1.10 डॉलर बढ़कर 99.02 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इससे पहले यह 99.5 डॉलर के आसपास भी पहुंच चुका था।

भारत के लिए महंगा तेल क्यों बड़ी चिंता

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची रहने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है।

तेल की कीमतों में तेजी के कारण मंगलवार को भी भारतीय रुपया एक महीने से ज्यादा समय में अपनी सबसे बड़ी गिरावट में रहा था। बुधवार को भी रुपये पर दबाव जारी रहा।

95 रुपये के करीब पहुंचा रुपया

बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 94.95 तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.74 पर बंद हुआ था। यानी शुरुआती कारोबार में रुपये में 21 पैसे तक की गिरावट दर्ज हुई।

Brent crude के करीब 100 डॉलर पहुंचने और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से रुपये पर दबाव बढ़ा है। बाजार में यह आशंका भी है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो रुपया 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो सकता है।

RBI के सामने भी बढ़ी चुनौती

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ऐसे समय में आई है जब भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। मंगलवार को भी RBI की मौजूदगी बाजार में देखी गई, लेकिन इसके बावजूद रुपया कमजोर हुआ।

महंगे तेल और कमजोर रुपये की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आयात लागत बढ़ने का दबाव बढ़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई और मुद्रा स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

IT और दूसरे सेक्टरों के शेयरों पर भी दबाव

बुधवार के कारोबार में IT कंपनियों के शेयरों में खास कमजोरी देखी गई। Nifty IT इंडेक्स करीब 3 फीसदी गिरा। HCLTech, Tech Mahindra, Infosys और TCS जैसे प्रमुख IT शेयर दबाव में रहे।

कुल मिलाकर बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। विदेशी बाजारों में कमजोरी, बढ़ता कच्चा तेल और मध्य-पूर्व की स्थिति ने जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ाया है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी

भारतीय बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है। मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 123.19 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।

बाजार के लिए अब कच्चे तेल की कीमत, मध्य-पूर्व में संघर्ष की दिशा, रुपये की चाल और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति अहम संकेतक बने हुए हैं। अमेरिका के आगामी महंगाई आंकड़ों पर भी वैश्विक बाजारों की नजर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *