सतना में जिला बाल कल्याण समिति (CWC) की एक सदस्य की राजनीतिक गतिविधियों में कथित भागीदारी अब विभागीय जांच तक पहुंच गई है। जांच में प्रथम दृष्टया नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर ने कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भोपाल भेज दिया है।
कलेक्टर ने डिप्टी कलेक्टर को सौंपी थी जांच
सतना जिले की बाल कल्याण समिति (CWC) की सदस्य अंजना तिवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की शिकायत की जांच में प्रथम दृष्टया नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने जांच प्रतिवेदन महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त, भोपाल को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर बी.के. मिश्रा को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच के दौरान संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया।
जांच में क्या सामने आया
जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि संबंधित सदस्य का आचरण किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) नियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने प्रकरण को विभागीय कार्रवाई के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, भोपाल भेज दिया है।
क्या कहते हैं नियम
जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) नियम, 2016 के नियम 88(5) के अनुसार बाल कल्याण समिति का कोई भी सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान किसी राजनीतिक दल में पदाधिकारी नहीं हो सकता और न ही ऐसी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो सकता है, जिससे समिति की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका हो।
क्या है पूरा मामला
मामला उस समय सामने आया था जब 1 सितंबर को आयोजित भाजपा के एक प्रदर्शन में CWC सदस्य अंजना तिवारी के शामिल होने के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे। तस्वीरों में वह भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय भूमिका में दिखाई दी थीं।
इसके बाद मामले की शिकायत की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह ने भी कहा था कि यदि बाल कल्याण समिति का कोई सदस्य किसी राजनीतिक दल की गतिविधियों में शामिल होता है, तो यह किशोर न्याय अधिनियम एवं उससे जुड़े नियमों के प्रावधानों के विपरीत माना जा सकता है।
अब आगे क्या होगा
कलेक्टर द्वारा जांच प्रतिवेदन भोपाल भेजे जाने के बाद अब मामले में अंतिम निर्णय महिला एवं बाल विकास विभाग स्तर पर लिया जाएगा। विभाग जांच प्रतिवेदन के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय करेगा।