नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर छात्रों के लिए संचालित PG की करीब पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 30 से 50 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, प्रशासन ने अभी मलबे में फंसे लोगों की सटीक संख्या की पुष्टि नहीं की है।
दोपहर करीब 1:30 बजे अचानक ढह गई इमारत
हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन इलाके में हुआ। यह क्षेत्र दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं।
पुलिस को करीब 1:34 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके बाद दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया।
PG में रह रहे थे छात्र
ढही हुई इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए PG के तौर पर किया जा रहा था। स्थानीय जानकारी के मुताबिक इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रहते थे।
मलबे में कितने लोग फंसे हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों की ओर से 30 से 50 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई है। राहत एवं बचाव दल मलबे में जीवन के संकेत तलाश रहे हैं।
अब तक 3 लोगों की मौत
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से लोगों को बाहर निकाला गया। उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है। कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और कुछ की हालत गंभीर बताई गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना पर दुख जताया है और हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि अधिकारी मौके पर प्रभावित लोगों की सहायता में जुटे हैं।
बेसमेंट में चल रहा था काम
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इमारत के बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। इसी दौरान इमारत ढह गई।
इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी बताई जा रही है। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। बेसमेंट में चल रहे काम और इमारत की संरचनात्मक स्थिति समेत कई पहलुओं की जांच की जा रही है।
NDRF समेत कई एजेंसियां रेस्क्यू में जुटीं
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF, DDMA, MCD और अन्य आपातकालीन एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं।
मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। संकरी गलियों के कारण राहत एवं बचाव टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने और मशीनों को लगाने में भी चुनौती का सामना करना पड़ा।
मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। बचाव दल लगातार मलबे के अलग-अलग हिस्सों की जांच कर रहे हैं।
आसपास की इमारत भी खाली कराई गई
हादसे के बाद एहतियात के तौर पर आसपास की एक इमारत को खाली कराया गया। प्रशासन की ओर से घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
दिल्ली सरकार और प्रशासनिक अधिकारी राहत एवं बचाव अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।
हादसे के बाद PG की सुरक्षा पर सवाल
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इलाके में कई इमारतें घनी और संकरी गलियों में स्थित हैं। ऐसे में किसी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इमारत ढहने के बाद इलाके में संचालित पुराने PG और हॉस्टल की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी दूसरी इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने की आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
जांच के बाद साफ होगी हादसे की असली वजह
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इमारत किस वजह से ढही। बेसमेंट में चल रहे काम, पुरानी संरचना और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही हादसे के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।