रीवा। डिजिटल डेस्क
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की मेडिकल प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां इलाज के लिए भर्ती एक मरीज को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, उसे शव बताकर परिजनों के हवाले करने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। पोस्टमार्टम की तैयारी से पहले मरीज के जीवित होने का पता चला और उसे दोबारा वार्ड में भर्ती कराया गया। मामले की पुष्टि स्थानीय रिपोर्टों में भी हुई है।
क्या है पूरा मामला
मामला 4 सितंबर की रात का बताया जा रहा है। सीधी निवासी गिरजा प्रसाद गुप्ता को गंभीर हालत में संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें मेडिसिन विभाग की चौथी मंजिल के जनरल वार्ड में बेड नंबर 33 पर रखा गया था।
इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद मरीज को शव मानकर मर्चुरी भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई और परिजनों से शव प्राप्त करने संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए।
लेकिन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पूरे मामले ने अचानक पलटी खा ली। मरीज जीवित मिला। इसके बाद उसे वापस वार्ड में लाकर इलाज के लिए भर्ती किया गया।
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका उपचार जारी है।
कागजों में ‘शव’, हकीकत में जिंदा मरीज
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मरीज को मृत घोषित करने के बाद केवल मौखिक तौर पर ही नहीं, बल्कि कागजी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई थी।
बताया गया है कि शव रिसीव करने संबंधी पर्ची पर परिजनों के हस्ताक्षर कराए गए। दस्तावेज पर संबंधित चिकित्सक के हस्ताक्षर और सील होने की भी बात सामने आई है।
यानी कागजों में मरीज की मौत की प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी, जबकि बाद में वही मरीज जीवित अवस्था में मिला।
मर्चुरी पहुंचा, PM से पहले सामने आई सच्चाई
मरीज को मृत घोषित करने के बाद उसे मर्चुरी भेज दिया गया था। परिजन पोस्टमार्टम की तैयारी में जुट गए थे। इसी दौरान मरीज के जीवित होने की जानकारी सामने आई और उसे वापस मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया।
मेडिकल विशेषज्ञों ने इस तरह की स्थिति को दुर्लभ बताते हुए ऐसे मामलों में चिकित्सकीय प्रक्रिया और मृत्यु की पुष्टि के तरीके को लेकर सवाल उठने की बात कही है।
अगर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो जाती और उससे पहले मरीज के जीवित होने की जानकारी नहीं मिलती, तो मामला बेहद गंभीर रूप ले सकता था।
संजय गांधी अस्पताल पहले भी रहा है सवालों के घेरे में
संजय गांधी अस्पताल में यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर पहले से विवाद और सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले को लेकर भी अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। इस मामले में कार्रवाई और जांच की खबरें सामने आई थीं।
ऐसे में एक जीवित मरीज को मृत घोषित किए जाने की घटना ने अस्पताल की मरीज पहचान, मृत्यु की पुष्टि और दस्तावेजी प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब जिम्मेदारी तय होने का इंतजार
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मरीज को मृत घोषित करने से पहले मृत्यु की पुष्टि किस प्रक्रिया के तहत की गई और दस्तावेजों में उसे मृत दर्ज करने तक की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई।
मरीज के जीवित मिलने के बाद उसे दोबारा उपचार में लिया गया है। अब मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने का इंतजार है।