FCRA 2.0 लागू: विदेशी चंदा लेने वाले NGOs के लिए बदले नियम, सरकार ने बढ़ाई सख्ती

केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान (Foreign Contribution) की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से FCRA 2.0 पोर्टल शुरू किया है। इसके साथ हाल में अधिसूचित संशोधित नियमों के तहत विदेशी फंड प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), ट्रस्ट, सोसायटी और अन्य पंजीकृत संस्थाओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को और विस्तृत बनाया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने FCRA 2.0 पोर्टल को लॉन्च करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाना और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है।

FCRA 2.0 क्या है

FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) वह कानून है जो भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन के स्वीकार और उपयोग को नियंत्रित करता है। नया FCRA 2.0 पोर्टल पंजीकरण, नवीनीकरण (Renewal), रिटर्न दाखिल करने और अन्य सेवाओं को ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराएगा।

नए नियमों में क्या बदला

हालिया संशोधनों के बाद संस्थाओं को पहले की तुलना में अधिक जानकारी देनी होगी। प्रमुख बदलावों में शामिल हैं—

  • संस्था की गतिविधियों का विस्तृत विवरण।
  • संचालन के भौगोलिक क्षेत्र की जानकारी।
  • आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया खातों का विवरण।
  • प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों, पत्रिकाओं या अन्य प्रकाशनों की जानकारी।
  • विदेशी फंड के उपयोग और रिकॉर्ड पर अधिक निगरानी।

धार्मिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ेगा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशी फंड का उपयोग कानून के दायरे में रहकर ही किया जा सकेगा। हालिया नियमों में धार्मिक परिवर्तन (Religious Conversion) से जुड़ी गतिविधियों के लिए विदेशी धन के उपयोग पर कड़े प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है। साथ ही “धार्मिक गतिविधि” की परिभाषा और अनुपालन को लेकर भी अधिक स्पष्टता लाई गई है।

सरकार का उद्देश्य क्या है

सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद—

  • विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना,
  • फर्जी या संदिग्ध लेन-देन पर रोक लगाना,
  • डिजिटल निगरानी को मजबूत करना,
  • और नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करना है।

किन संस्थाओं पर होगा असर

इन नियमों का असर उन संस्थाओं पर पड़ेगा जो FCRA के तहत पंजीकृत हैं, जैसे—

  • गैर-सरकारी संगठन (NGOs)
  • धार्मिक ट्रस्ट
  • चैरिटेबल संस्थाएं
  • शैक्षणिक और सामाजिक संगठन
  • विदेशी अनुदान प्राप्त करने वाली अन्य पंजीकृत संस्थाएं।

विपक्ष और कुछ संगठनों की आपत्ति

नए नियमों को लेकर कुछ चर्च संगठनों और विपक्षी दलों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि अतिरिक्त अनुपालन आवश्यकताएं सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं सरकार का पक्ष है कि यह कदम जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

FAQ

प्रश्न: FCRA 2.0 क्या है?
उत्तर: यह विदेशी चंदे से जुड़े पंजीकरण, नवीनीकरण और अनुपालन को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने वाला नया पोर्टल और व्यवस्था है।

प्रश्न: क्या सभी NGOs पर इसका असर होगा?
उत्तर: यह मुख्य रूप से उन संस्थाओं पर लागू होगा जो FCRA के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करती हैं।

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