ट्रंप की धमकी से भड़का ईरान, बीच वार्ता से उठकर चला गया प्रतिनिधिमंडल; फिर हालात संभालने में जुटा पाकिस्तान

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम वार्ता के दौरान उस समय तनाव बढ़ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित सख्त चेतावनियों और बयानों से नाराज ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक छोड़कर बाहर निकल गया। इस घटनाक्रम से बातचीत के पूरी तरह टूटने की आशंका पैदा हो गई थी, लेकिन बाद में पाकिस्तान और अन्य मध्यस्थ देशों के प्रयासों से हालात को संभाल लिया गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्विट्जरलैंड में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना और विवादित मुद्दों पर सहमति बनाने की दिशा में आगे बढ़ना था। हालांकि बातचीत के दौरान ट्रंप के बयानों को लेकर ईरानी पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और प्रतिनिधिमंडल ने विरोध स्वरूप बैठक से वॉकआउट कर दिया।

वार्ता टूटने के कगार पर पहुंची

ईरान के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि दबाव और धमकी के माहौल में किसी भी सार्थक बातचीत की उम्मीद नहीं की जा सकती। ईरानी प्रतिनिधियों के बाहर निकलने के बाद कुछ समय के लिए वार्ता पूरी तरह ठप पड़ गई और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

पाकिस्तान ने निभाई अहम भूमिका

स्थिति बिगड़ती देख पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों ने मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दीं। कूटनीतिक स्तर पर लगातार संपर्क बनाए गए, जिसके बाद दोनों पक्षों को दोबारा बातचीत की मेज पर लाने में सफलता मिली। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका के कारण वार्ता को फिर से शुरू करने का रास्ता निकला।

आगे भी जारी रहेगी बातचीत

तनावपूर्ण माहौल के बावजूद दोनों पक्षों ने संवाद की प्रक्रिया जारी रखने पर सहमति जताई है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर नई बैठकों का दौर चल सकता है, जिससे लंबित मुद्दों पर समाधान तलाशने की कोशिश की जाएगी।

क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई वर्षों से परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की राजनीति को लेकर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में स्विट्जरलैंड में हुई यह वार्ता दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि ताजा घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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