आस्था, परंपरा और भक्ति का सबसे बड़ा उत्सव आज ओडिशा के पुरी में शुरू हो रहा है। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा आज भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे। इस दिव्य यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
आज क्यों खास है रथ यात्रा?
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे बड़े उत्सवों में से एक मानी जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से निकलकर करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर जाते हैं। मान्यता है कि यह भगवान की अपनी मौसी के घर की वार्षिक यात्रा होती है। नौ दिन बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से तीनों देवता पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं।
आज का पूरा कार्यक्रम
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार प्रमुख अनुष्ठान इस प्रकार हैं—
- सुबह 6:00 बजे तक – मंगल आरती और प्रारंभिक नीतियां
- सुबह 9:30 बजे – पहंडी बीजे (भगवान को मंदिर से रथ तक लाने की परंपरा)
- दोपहर 2:00 बजे – गजपति महाराज द्वारा ‘छेरा पहंरा’ (स्वर्ण झाड़ू से रथों की सफाई)
- शाम लगभग 4:00 बजे – श्रद्धालुओं द्वारा तीनों रथों को खींचने की शुरुआत
मौसम और अनुष्ठानों की अवधि के अनुसार समय में थोड़ा बदलाव संभव है।
तीनों रथों के नाम और विशेषताएं
- भगवान जगन्नाथ – नंदीघोष रथ
- भगवान बलभद्र – तालध्वज रथ
- देवी सुभद्रा – दर्पदलन (देवदलन) रथ
इन तीनों विशाल लकड़ी के रथों का निर्माण हर वर्ष नए सिरे से किया जाता है और यात्रा पूरी होने के बाद इन्हें परंपरा के अनुसार अलग कर दिया जाता है।
‘छेरा पहंरा’ क्यों है सबसे खास रस्म
रथ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान छेरा पहंरा माना जाता है। इसमें पुरी के गजपति महाराज स्वर्ण झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। यह परंपरा संदेश देती है कि भगवान के सामने राजा और सामान्य व्यक्ति सभी समान हैं।
लाखों श्रद्धालु, कड़ी सुरक्षा
रथ यात्रा को लेकर पुरी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस बल, ड्रोन, सीसीटीवी और अन्य निगरानी व्यवस्था तैनात की गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगे।
नौ दिन बाद होगी बहुदा यात्रा
गुंडिचा मंदिर पहुंचने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नौ दिनों तक वहीं विराजमान रहेंगे। इसके बाद बहुदा यात्रा के दौरान तीनों रथ वापस श्रीमंदिर लौटेंगे।
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