उत्तर प्रदेश के कौशांबी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के दौरान ऐसा कथित फर्जीवाड़ा सामने आया, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। शादी की सभी रस्में पूरी हो गई थीं, लेकिन जब बायोमेट्रिक सत्यापन हुआ तो फिंगरप्रिंट मशीन ने ऐसा राज खोला कि अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
क्या है पूरा मामला
कौशांबी जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बड़ी संख्या में जोड़ों का विवाह कराया गया। कार्यक्रम के बाद लाभार्थियों के दस्तावेजों और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान एक मामले में फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं हुआ।
जांच आगे बढ़ी तो अधिकारियों को संदेह हुआ कि विवाह के समय युवती के साथ बैठा व्यक्ति वास्तविक दूल्हा नहीं था। प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर ‘भाड़े के दूल्हे’ को बैठाकर सरकारी योजना का लाभ लेने की कोशिश का मामला सामने आया।
फिंगरप्रिंट मशीन ने कैसे पकड़ी गड़बड़ी
योजना के तहत लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान फिंगरप्रिंट का रिकॉर्ड संबंधित दस्तावेजों से मेल नहीं खाया।
बायोमेट्रिक मिलान में विसंगति सामने आने के बाद अधिकारियों ने दस्तावेजों की दोबारा जांच की, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
जांच में क्या सामने आया
प्रारंभिक जांच के अनुसार, युवती की पहचान नगमा के रूप में हुई है। आरोप है कि सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए वास्तविक दूल्हे की जगह किसी अन्य व्यक्ति को विवाह मंडप में बैठाया गया। मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना क्या है
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विवाह में सहायता के उद्देश्य से संचालित की जाती है। पात्र जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया जाता है और सरकार की ओर से निर्धारित आर्थिक सहायता एवं गृहस्थी का सामान उपलब्ध कराया जाता है।
इसी कारण लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी व्यवस्था लागू की गई है, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में अनियमितताओं के आरोप पहले भी अलग-अलग जिलों से सामने आ चुके हैं। इन्हीं घटनाओं के बाद लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था को और मजबूत किया गया था।