क्या खंडित मूर्ति की पूजा करनी चाहिए? जानिए धर्म शास्त्र और परंपराओं की मान्यता

नई दिल्ली। घर के मंदिर में रखी भगवान की मूर्ति यदि किसी कारणवश टूट जाए या उसका कोई हिस्सा खंडित हो जाए, तो अधिकांश लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या ऐसी मूर्ति की पूजा जारी रखनी चाहिए। सनातन परंपरा में इस विषय पर स्पष्ट मान्यताएं मिलती हैं, हालांकि अलग-अलग संप्रदायों और आचार्यों की परंपराओं में कुछ अंतर भी देखने को मिलता है।

क्या कहते हैं धर्म शास्त्र

सनातन धर्म की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार खंडित (टूटी हुई) मूर्ति को नियमित पूजा के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में नई मूर्ति स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा करने की सलाह दी जाती है। कई धार्मिक परंपराओं में यह भी कहा गया है कि मूर्ति में स्थापित देवत्व की विधिपूर्वक विदाई (विसर्जन या उचित सम्मानपूर्वक स्थानांतरण) के बाद नई मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए।

अगर मूर्ति हल्की-सी क्षतिग्रस्त हो तो..

यदि मूर्ति पर केवल हल्का रंग उखड़ गया हो या मामूली खरोंच हो, तो कई आचार्य इसे खंडित नहीं मानते। लेकिन यदि मूर्ति का हाथ, पैर, सिर या कोई प्रमुख अंग टूट गया हो, तो उसे खंडित माना जाता है और नई मूर्ति स्थापित करने की सलाह दी जाती है। ध्यान रहे कि इस विषय में स्थानीय परंपराएं और गुरुजन की सलाह भी महत्वपूर्ण होती है।

खंडित मूर्ति का क्या करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खंडित मूर्ति को सामान्य कचरे में फेंकना उचित नहीं माना जाता। इसके बजाय श्रद्धा और सम्मान के साथ उसका विसर्जन किया जाता है या किसी मंदिर अथवा ऐसी संस्था को सौंपा जाता है जो धार्मिक सामग्री का सम्मानपूर्वक निस्तारण करती हो।

क्या घर के मंदिर में खंडित मूर्ति रखना चाहिए

कई धार्मिक और वास्तु परंपराओं में घर के मंदिर में खंडित मूर्ति रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे धार्मिक आस्था और पूजा की शुद्धता का भाव प्रमुख माना जाता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • खंडित मूर्ति की नियमित पूजा से बचने की परंपरा प्रचलित है।
  • नई मूर्ति स्थापित करने से पहले विधिपूर्वक पूजा करें।
  • टूटी मूर्ति को कूड़ेदान में न फेंकें।
  • यदि किसी विशेष संप्रदाय से जुड़े हैं, तो अपने गुरु या स्थानीय पुजारी से मार्गदर्शन लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *