आजादी के बाद भी एक नहीं था मध्यप्रदेश, जानिए कैसे बना यह राज्य

भोपाल। डिजिटल डेस्क

आज जिस प्रदेश को हम मध्यप्रदेश के नाम से जानते हैं, उसका इतिहास केवल 1 नवंबर 1956 से शुरू नहीं होता। इसके पीछे कई रियासतों, राजघरानों, ब्रिटिश शासन और प्रशासनिक बदलावों की लंबी कहानी छिपी है। कभी यहां ग्वालियर, इंदौर, भोपाल और रीवा जैसी रियासतों का शासन था, तो कहीं ब्रिटिश सरकार का सीधा प्रशासन चलता था।

आज मध्यप्रदेश अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी के बाद भी यह प्रदेश इसी रूप में मौजूद नहीं था? वर्तमान मध्यप्रदेश का निर्माण चार प्रमुख प्रशासनिक इकाइयों को मिलाकर किया गया था। आइए जानते हैं कि मध्यप्रदेश कैसे बना और इसके पहले यहां क्या था।

आजादी से पहले कैसा था मध्यप्रदेश का क्षेत्र

15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ, उस समय आज के मध्यप्रदेश का पूरा इलाका एक राज्य नहीं था। इसका बड़ा हिस्सा देशी रियासतों और ब्रिटिश शासन के अधीन क्षेत्रों में बंटा हुआ था।

ग्वालियर, इंदौर, रीवा, भोपाल, ओरछा, दतिया, पन्ना, नागौद और कई अन्य रियासतों की अपनी अलग पहचान और प्रशासन था।

वहीं महाकौशल और छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से ब्रिटिश शासन के अधीन सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार का हिस्सा थे।

आजादी के बाद इन रियासतों का भारतीय संघ में विलय हुआ और प्रशासनिक सुविधा के लिए नए राज्यों का गठन किया गया।

1956 से पहले चार प्रमुख हिस्सों में बंटा था मध्यप्रदेश

आज के मध्यप्रदेश को समझने के लिए उस समय की चार प्रमुख प्रशासनिक इकाइयों को जानना जरूरी है।

  1. मध्यभारत: ग्वालियर और इंदौर की रियासतों का इलाका

मध्यभारत का गठन मई 1948 में हुआ था। इसमें ग्वालियर, इंदौर और मालवा क्षेत्र की कई रियासतों को मिलाया गया था।

ग्वालियर के महाराजा जीवाजीराव सिंधिया को मध्यभारत का राजप्रमुख बनाया गया। इसकी राजधानी ग्वालियर थी। बाद में उज्जैन भी प्रशासनिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना।

इस क्षेत्र में आज के ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम और आसपास के इलाके शामिल थे।

  1. विंध्य प्रदेश: बघेलखंड और बुंदेलखंड की रियासतों का समूह

विंध्य प्रदेश का गठन 4 अप्रैल 1948 को हुआ था। इसमें रीवा, पन्ना, सतना, सीधी, शहडोल, छतरपुर, दतिया और आसपास की कई रियासतें शामिल थीं।

इसकी राजधानी रीवा थी। यहां रीवा रियासत का विशेष प्रभाव था और महाराजा मार्तंड सिंह को राजप्रमुख बनाया गया था।

1950 में विंध्य प्रदेश को ‘सी’ श्रेणी के राज्य का दर्जा मिला। इसके बाद केंद्र सरकार के अधीन इसका प्रशासन संचालित हुआ।

यानी आज का विंध्य क्षेत्र भी एक समय अलग राज्य विंध्य प्रदेश का हिस्सा था।

  1. भोपाल राज्य: नवाबों के शासन वाला क्षेत्र

भोपाल भी आजादी के बाद एक अलग राज्य था। यहां नवाबों का शासन रहा था।

भोपाल रियासत के भारत में विलय के बाद 1949 में इसे भारतीय संघ में शामिल किया गया। 1950 में भोपाल को ‘सी’ श्रेणी के राज्य का दर्जा मिला।

इसकी राजधानी भोपाल थी। 1956 में इसे भी नए मध्यप्रदेश में शामिल कर लिया गया।

  1. पुराना मध्यप्रदेश: सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार

आज के मध्यप्रदेश का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटिश शासन के दौरान सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार कहलाता था।

इसमें महाकौशल और छत्तीसगढ़ के इलाके शामिल थे। नागपुर इसका प्रमुख प्रशासनिक केंद्र था।

आजादी के बाद यह पुराना मध्यप्रदेश बना। उस समय नागपुर इसकी राजधानी थी।

हालांकि 1956 में राज्य पुनर्गठन के दौरान मराठी भाषी विदर्भ के जिले नए बंबई राज्य में चले गए और शेष क्षेत्र नए मध्यप्रदेश का हिस्सा बने।

1 नवंबर 1956 को कैसे बना नया मध्यप्रदेश

आजाद भारत में राज्यों की सीमाओं को व्यवस्थित करने और प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया था।

इसके बाद संसद ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित किया। इसी कानून की धारा 9 में नए मध्यप्रदेश के गठन का प्रावधान किया गया।

1 नवंबर 1956 को चार प्रमुख प्रशासनिक इकाइयों को मिलाकर नया मध्यप्रदेश अस्तित्व में आया।

इसमें शामिल थे:

पुराना मध्यप्रदेश के निर्धारित क्षेत्र।

मध्यभारत।

विंध्य प्रदेश।

भोपाल राज्य।

इसके अलावा राजस्थान के कोटा जिले की सिरोंज उपखंड को भी नए मध्यप्रदेश में शामिल किया गया।

इस तरह अलग-अलग रियासतों और प्रशासनिक क्षेत्रों को मिलाकर एक बड़ा राज्य तैयार हुआ, जिसे मध्यप्रदेश नाम दिया गया।

नागपुर नहीं, भोपाल बनी नई राजधानी

मध्यप्रदेश बनने के बाद एक बड़ा सवाल राजधानी को लेकर था। पुराने मध्यप्रदेश की राजधानी नागपुर थी, लेकिन राज्य पुनर्गठन के बाद नागपुर नए बंबई राज्य का हिस्सा बन गया।

ऐसे में भोपाल को नए मध्यप्रदेश की राजधानी बनाया गया।

जबलपुर को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्यालय बनाया गया। इंदौर और ग्वालियर में भी उच्च न्यायालय की अस्थायी पीठें स्थापित की गईं।

इस तरह 1 नवंबर 1956 को भोपाल नए मध्यप्रदेश की राजधानी के रूप में स्थापित हुआ।

2000 में फिर बंट गया मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ बना अलग राज्य

1956 में बने मध्यप्रदेश का नक्शा आज जैसा नहीं था। उस समय छत्तीसगढ़ भी मध्यप्रदेश का हिस्सा था।

लंबे समय से छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने की मांग उठती रही। आखिरकार संसद ने मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 पारित किया।

1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ नया राज्य बना। रायपुर को इसकी राजधानी बनाया गया।

इसके बाद मध्यप्रदेश का भौगोलिक स्वरूप काफी हद तक आज जैसा हो गया।

70 साल का सफर, कई बदलावों से बनी प्रदेश की पहचान

1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए मध्यप्रदेश ने 2026 में अपने गठन के 70 वर्ष पूरे कर लिए हैं और 71वां स्थापना दिवस मना रहा है।

इस दौरान प्रदेश की प्रशासनिक सीमाओं, जिलों और राजनीतिक व्यवस्था में कई बदलाव हुए। 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद प्रदेश का वर्तमान स्वरूप सामने आया।

आज मध्यप्रदेश को देश के हृदय प्रदेश के रूप में जाना जाता है। इसकी पहचान विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा, निमाड़, महाकौशल और ग्वालियर-चंबल जैसे अलग-अलग सांस्कृतिक और भौगोलिक क्षेत्रों से मिलकर बनी है।

यानी आज का मध्यप्रदेश केवल एक तारीख को बना राज्य नहीं है, बल्कि कई रियासतों, संस्कृतियों और ऐतिहासिक बदलावों से मिलकर बनी एक पहचान है।

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