मैहर कुआं हादसा: 10 फीट नीचे बुझ गई मशाल, वैज्ञानिक जांच में सामने आई मौत की असली वजह

मैहर। मैहर जिले के खरमसेड़ा गांव में बैल को बचाने के दौरान तीन ग्रामीणों की दर्दनाक मौत के मामले में वैज्ञानिक जांच ने बड़ा खुलासा किया है। एफएसएल और पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 45 फीट गहरे कुएं में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम था, जबकि मीथेन गैस सामान्य से कई गुना अधिक पाई गई। इसी जहरीले वातावरण ने कुछ ही मिनटों में तीनों ग्रामीणों की जान ले ली।

10 फीट नीचे जाते ही बुझ गई मशाल

शनिवार को एफएसएल टीम और वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। करीब 45 फीट गहरे और 18 फीट चौड़े कुएं की जांच के दौरान पाया गया कि लगभग 10 फीट नीचे पहुंचते ही ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम हो जाता है। इसकी पुष्टि के लिए पेट्रोल में भीगे कपड़े की मशाल कुएं में कई बार नीचे उतारी गई, लेकिन हर बार करीब 10 फीट की गहराई पर पहुंचते ही मशाल बुझ गई। इससे स्पष्ट हो गया कि कुएं के निचले हिस्से में पर्याप्त ऑक्सीजन मौजूद नहीं थी।

मीथेन गैस का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक

पर्यावरण विभाग की जांच में कुएं के भीतर मीथेन गैस का स्तर 12,900 पीपीएम से अधिक दर्ज किया गया। वहीं ऑक्सीजन केवल 12 से 13 प्रतिशत पाई गई, जबकि सामान्य वातावरण में यह करीब 21 प्रतिशत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम ऑक्सीजन और मीथेन गैस की अधिक मात्रा किसी भी व्यक्ति को कुछ ही क्षणों में बेहोश कर सकती है। यदि समय रहते बाहर न निकाला जाए तो दम घुटने से मौत हो सकती है।

बारिश के बाद बना जानलेवा गैस चैंबर

वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंह के अनुसार यह कुआं लंबे समय से सूखा पड़ा था। इसके भीतर सूखे पत्ते, घास और अन्य जैविक कचरा जमा था। हाल ही में हुई बारिश के बाद करीब डेढ़ फीट पानी भरने से यह जैविक पदार्थ सड़ने लगा और बड़ी मात्रा में मीथेन गैस बनने लगी।यही जहरीली गैस पहले कुएं में गिरे बैल और बाद में उसे बचाने उतरे तीन ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हुई।

प्रशासन ने शुरू की कुआं बंद कराने की प्रक्रिया

हादसे के बाद प्रशासन ने संबंधित कुएं को बंद कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। वहीं शनिवार को अमरपाटन अस्पताल में चिकित्सकों डॉ. रमाकांत और डॉ. हिमांशु पांडेय ने तीनों मृतकों का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। गांव में घटना के बाद से शोक का माहौल बना हुआ है।

विशेषज्ञों की सलाह: बिना जांच कभी न उतरें कुएं में

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी पुराने, सूखे या लंबे समय से बंद पड़े कुएं, टैंक या बोरवेल में बिना गैस और ऑक्सीजन की जांच के प्रवेश न करें। ऐसे स्थानों पर बचाव अभियान केवल प्रशिक्षित टीम और सुरक्षा उपकरणों के साथ ही चलाया जाना चाहिए।

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