गांव में घुसा बांधवगढ़ का हाथी E-5, दहशत में ग्रामीण; 200 मीटर दूर रहने की अपील

सतना। डिजिटल डेस्क

बांधवगढ़ नेशनल पार्क से निकलकर मैहर वन मंडल की अमरपाटन रेंज में पहुंचा हाथी E-5 अब रामनगर के गैलहरी गांव में घुस गया है। रविवार रात करीब 9 बजे हाथी के गांव में पहुंचने की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को सतर्क करते हुए निगरानी शुरू कर दी। हाथी की मौजूदगी से देर रात तक गांव में दहशत का माहौल बना रहा।

छठवें दिन गांव में पहुंचा हाथी

जानकारी के अनुसार हाथी E-5 7-8 सितंबर की दरमियानी रात बांधवगढ़ नेशनल पार्क से निकलकर मैहर वन मंडल की अमरपाटन रेंज में पहुंचा था। लगातार मूवमेंट करते हुए हाथी रविवार रात रामनगर क्षेत्र के गैलहरी गांव में पहुंच गया।

हाथी के गांव में घुसने की जानकारी मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने ग्रामीणों को घरों से बाहर नहीं निकलने की समझाइश दी और हाथी की गतिविधियों पर निगरानी शुरू कर दी।

रेडियो कॉलर से लगातार ट्रैकिंग

अमरपाटन रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी के अनुसार हाथी E-5 की गतिविधियों पर रेडियो कॉलर के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग की टीम स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत हाथी के व्यवहार और मूवमेंट की निगरानी कर रही है।

हाथी की लोकेशन के आधार पर आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। उसके आगे बढ़ने की संभावना को देखते हुए ओबरा, छिरहाई, चोरखरी, भीषमपुर, पठरा और छांईन समेत आसपास के गांवों में वन विभाग की टीमें तैनात हैं।

वन विभाग ने ग्रामीणों से कहा है कि हाथी के मूवमेंट की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग या प्रशासन को सूचना दें।

फोटो-सेल्फी के लिए हाथी के पास न जाएं

वन विभाग ने ग्रामीणों को हाथी से विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि हाथी के पास जाकर फोटो या सेल्फी लेने का प्रयास न करें। टॉर्च या तेज रोशनी डालकर उसे परेशान या उकसाने से भी बचें।

ग्रामीणों से हाथी से कम से कम 200 मीटर की सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

कच्चे मकानों में न रहें, पक्के भवनों में लें शरण

वन विभाग ने जंगल के किनारे बने कच्चे मकानों में हाथी की मौजूदगी के दौरान नहीं रहने की सलाह दी है। जरूरत पड़ने पर ग्रामीण पंचायत भवन या सामुदायिक भवन जैसे पक्के स्थानों पर शरण ले सकते हैं।

विभाग ने यह भी बताया कि हाथी के कारण फसल को नुकसान होने की स्थिति में नियमानुसार राजस्व विभाग से क्षतिपूर्ति मिलने का प्रावधान है।

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