भोपाल। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर तीन दिन से आंदोलन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टरों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी करने पर सहमति जताई है। इसके बाद भोपाल में चल रहा इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन समाप्त हो गया और डॉक्टर काम पर लौट आए।
पहले मिलते थे 337 से बढ़कर 21500 होगा स्टाइपेंड
अब तक मध्य प्रदेश में MBBS इंटर्न डॉक्टरों को 14337 प्रति माह स्टाइपेंड मिल रहा था। सरकार के नए फैसले के बाद यह राशि बढ़कर 21,500 प्रति माह हो जाएगी। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इंटर्न डॉक्टरों, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद इसकी घोषणा की।
सरकार के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सहमति के बाद तय की गई है। इससे इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने मौजूदा स्टाइपेंड की तुलना में 7,163 रुपए अधिक मिलेंगे।
तीन दिन से चल रहा था आंदोलन
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर MBBS इंटर्न डॉक्टर भोपाल में तीन दिन से आंदोलन कर रहे थे। प्रदर्शन की शुरुआत गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल से हुई थी। डॉक्टरों की मांग थी कि उनका मासिक स्टाइपेंड बढ़ाया जाए।
मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने सड़क पर प्रदर्शन और चक्काजाम भी किया था। आंदोलन के कारण भोपाल में यातायात प्रभावित हुआ और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन और लाठीचार्ज का मुद्दा
आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को हटाने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज भी हुआ। इस कार्रवाई में कुछ इंटर्न डॉक्टरों के घायल होने की बात सामने आई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना का वीडियो देखने के बाद पुलिस कार्रवाई की जांच के निर्देश दिए थे।
सरकार ने बाद में इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि घायल छात्रों के इलाज में भी सरकार सहयोग करेगी।
मांग पूरी होने के बाद डॉक्टरों ने खत्म किया आंदोलन
सरकार के साथ बातचीत में स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति बनने के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया। इसके साथ ही जूनियर डॉक्टरों ने भी अपना विरोध खत्म कर काम पर लौटने की घोषणा की।
हालांकि आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़े असर को लेकर भी चर्चा हुई। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक हमीदिया अस्पताल में आंदोलन के दौरान 50 से ज्यादा ऑपरेशन टलने की जानकारी सामने आई।