मध्य प्रदेश में अब गांवों की पहचान सिर्फ विकास कार्यों से नहीं, बल्कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य के बेहतर प्रदर्शन से भी होगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने ऐसी ग्राम पंचायतों को ‘सुमन पंचायत’ घोषित करने का फैसला किया है, जहां पूरे साल मातृ मृत्यु, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत और खसरा-रूबेला के मामले शून्य रहेंगे।
क्या है ‘सुमन पंचायत’ पहल
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ‘सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) पंचायत पहल’ का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना है। इस योजना के तहत समुदाय आधारित निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें तथा रोकी जा सकने वाली मौतों में कमी लाई जा सके।
इन मानकों पर होगा पंचायतों का चयन
एनएचएम के दिशा-निर्देशों के अनुसार 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2026 के बीच संबंधित ग्राम पंचायत में निम्नलिखित मानकों का पालन होना जरूरी होगा—
- एक भी मातृ मृत्यु नहीं हो।
- पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु शून्य रहे।
- खसरा (Measles) और रूबेला (Rubella) का एक भी मामला दर्ज न हो।
इन तीनों मानकों पर खरी उतरने वाली पंचायतें ही ‘सुमन पंचायत’ बनने की पात्र होंगी।
चार स्तर पर होगा सत्यापन
पात्र पंचायतों का चयन बहुस्तरीय प्रक्रिया से किया जाएगा।
- ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और पंचायत सचिव आवेदन करेंगे।
- विकासखंड स्तर पर बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सत्यापन करेंगे।
- जिला कलेक्टर की अनुशंसा के बाद प्रस्ताव राज्य स्तर पर भेजा जाएगा।
- अंतिम परीक्षण के बाद राज्य स्तर पर चयन किया जाएगा।
26 जनवरी 2027 को होगा सम्मान
योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया जनवरी 2027 में पूरी होगी।
- 5 जनवरी: ग्राम पंचायतें आवेदन भेजेंगी।
- 10 जनवरी: विकासखंड स्तर पर प्रस्ताव भेजे जाएंगे।
- 15 जनवरी: जिला स्तर से राज्य को अनुशंसा भेजी जाएगी।
- 16 से 20 जनवरी: राज्य स्तर पर परीक्षण होगा।
- 26 जनवरी 2027: चयनित पंचायतों, विकासखंडों और जिलों को सम्मानित किया जाएगा।
पंचायतों को मिलेगी 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
चयनित ‘सुमन पंचायत’ को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
इसके अलावा सर्वाधिक पात्र पंचायतों वाले—
- विकासखंड को 50 हजार रुपए
- जिले को 50 हजार रुपए
की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों के परिवहन और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने में किया जाएगा।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी मजबूत होगी। गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण और बच्चों की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।