कभी भाजपा के सबसे ताकतवर चेहरों में गिने जाने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा इस बार दतिया उपचुनाव में टिकट से ही बाहर हो गए। फैसले के बाद जिस तरह समर्थकों का गुस्सा सड़कों पर फूटा और पार्टी के भीतर बगावत के सुर सुनाई दिए, उसने इस निर्णय को और रहस्यमयी बना दिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि भाजपा ने अपने दिग्गज नेता पर दांव लगाने के बजाय नया चेहरा चुन लिया? आइए जानते हैं उन वजहों को, जिनकी राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार गए थे। बाद में राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के कारण उपचुनाव की नौबत आई, लेकिन भाजपा ने इस बार नया चेहरा उतारने का फैसला किया। कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पिछली हार ने टिकट वितरण पर असर डाला।
1. संगठन ने नए चेहरे पर लगाया दांव
भाजपा ने दतिया से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। माना जा रहा है कि पार्टी ने स्थानीय संगठन और भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए नया चेहरा आगे किया। हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर टिकट बदलने का कारण नहीं बताया है।
2. क्या आंतरिक सर्वे का असर पड़ा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के आंतरिक फीडबैक और सर्वे में बदलाव की जरूरत महसूस की गई। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में इसे संभावित कारण बताया गया।
3. जातीय समीकरण भी बना फैक्टर
दतिया के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने अलग रणनीति अपनाई हो सकती है। चुनावी गणित को साधने के लिए उम्मीदवार बदलना भी एक वजह मानी जा रही है।
4. विरोध ने बढ़ा दी सियासी हलचल
टिकट की घोषणा के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थक सड़कों पर उतर आए। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर चक्का जाम हुआ, पुलिस के साथ झड़प हुई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। जिला भाजपा अध्यक्ष और कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरों ने भी इस फैसले को राजनीतिक संकट का रूप दे दिया।
5. अब सबसे बड़ा सवाल
क्या भाजपा का यह फैसला दतिया में चुनावी बढ़त दिलाएगा या नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी पार्टी के लिए चुनौती बनेगी? इसका जवाब उपचुनाव के नतीजे ही देंगे। फिलहाल पार्टी की ओर से टिकट बदलने की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
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