पति की जिंदगी बचाने पत्नी ने दी अपनी किडनी, ग्वालियर के सरकारी अस्पताल में सफल ट्रांसप्लांट

ग्वालियर। डिजिटल डेस्क

शादी के सात फेरों में जीवनभर साथ निभाने का वादा करने वाली 55 वर्षीय मीना गुप्ता ने पति कृष्णकांत गुप्ता की जिंदगी बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान कर दी। ग्वालियर के शासकीय सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में करीब 8 घंटे चले ऑपरेशन के बाद किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा।

दोनों किडनियां खराब होने के बाद ट्रांसप्लांट की जरूरत

छतरपुर निवासी 60 वर्षीय कृष्णकांत गुप्ता लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी बढ़ने के साथ उनकी दोनों किडनियों ने काम करना बंद कर दिया। परिवार के सामने उनके इलाज और जीवन बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट का विकल्प था।

ऐसे समय में डोनर की तलाश परिवार के लिए बड़ी चुनौती थी। कृष्णकांत की पत्नी 55 वर्षीय मीना गुप्ता ने आगे आकर अपनी एक किडनी दान करने का फैसला किया।

मेडिकल जांच में डोनर के लिए उपयुक्त मिलीं मीना

किडनी दान करने के फैसले के बाद मीना की जरूरी मेडिकल जांच की गई। जांच में उनकी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाई गई, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने प्रत्यारोपण की प्रक्रिया की तैयारी शुरू की।

ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध शासकीय सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कृष्णकांत का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया।

करीब 8 घंटे चला ऑपरेशन

अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने करीब 8 घंटे तक जटिल ऑपरेशन किया। प्रक्रिया के दौरान मीना की एक किडनी निकालकर उनके पति कृष्णकांत के शरीर में प्रत्यारोपित की गई।

ऑपरेशन के बाद दोनों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। मीना को आईसीयू में भर्ती किया गया है, जबकि कृष्णकांत को विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट में रखा गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार दोनों की स्थिति बेहतर बताई जा रही है और चिकित्सकों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ नि:शुल्क इलाज

इस ट्रांसप्लांट की एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क किया गया। निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट पर बड़ा खर्च आ सकता है, ऐसे में सरकारी अस्पताल में योजना के तहत यह सुविधा मिलना मरीज के परिवार के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण राहत है।

कृष्णकांत के बेटे सुमित गुप्ता ने कहा कि पिता की बीमारी से पूरा परिवार परेशान था। मां के किडनी दान करने के फैसले और डॉक्टरों की मेहनत से परिवार को नई उम्मीद मिली।

ग्वालियर में ट्रांसप्लांट सुविधा से आसपास के मरीजों को लाभ

ग्वालियर के शासकीय सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से ग्वालियर-चंबल संभाग के मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज का विकल्प मिला है। इसका लाभ उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी मिल सकता है।

पति-पत्नी के रिश्ते की मिसाल बनी कहानी

कृष्णकांत और मीना की कहानी एक सफल मेडिकल प्रक्रिया के साथ पति-पत्नी के रिश्ते में भरोसे और समर्पण को भी सामने लाती है। पति की गंभीर बीमारी के बीच मीना ने अपनी एक किडनी दान करने का फैसला लिया और ट्रांसप्लांट के जरिए उन्हें नई जिंदगी मिलने की उम्मीद बनी है।

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