मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को उनके जाति प्रमाणपत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। जांच समिति ने विस्तृत पड़ताल के बाद शिकायत को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति (SC) प्रमाणपत्र वैध है।
क्या था पूरा विवाद?
प्रतिमा बागरी के खिलाफ शिकायत में दावा किया गया था कि वह ‘राजपूत बागरी’ समुदाय से संबंध रखती हैं, इसलिए उन्हें अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिलना चाहिए। शिकायत के आधार पर उनके जाति प्रमाणपत्र की जांच कराई गई।
जांच में सामने आए 4 अहम तथ्य
जांच समिति ने कई दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद चार महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिए—
- 1916-17 के वंशावली एवं राजस्व अभिलेखों में परिवार का उल्लेख बागरी समुदाय से संबंधित मिला।
- प्रतिमा बागरी के पूर्वजों के संबंध में उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड में भी बागरी जाति का उल्लेख दर्ज पाया गया।
- मंत्री के स्कूल रिकॉर्ड (कक्षा 5 और 11वीं) में भी उनकी जाति ‘बागरी’ दर्ज थी।
- समिति को ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि बागरी समुदाय का सामाजिक या वैवाहिक संबंध राजपूत अथवा ठाकुर जैसी उच्च जातियों से रहा हो।
समिति ने क्या कहा
रिपोर्ट में कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप उपलब्ध दस्तावेजों से प्रमाणित नहीं होते। इसलिए प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र को अमान्य ठहराने का कोई आधार नहीं बनता। इसी आधार पर शिकायत को खारिज कर दिया गया।
राजनीतिक मायने भी अहम
प्रतिमा बागरी मोहन यादव सरकार में राज्य मंत्री हैं। ऐसे में जांच समिति की यह रिपोर्ट सरकार के लिए भी राहत मानी जा रही है। हालांकि यदि कोई पक्ष समिति की रिपोर्ट से असहमत है, तो वह नियमानुसार न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दे सकता है।