अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंदिर परिसर और ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों की करीब 8 घंटे तक मैराथन जांच की। इस दौरान पूर्व ट्रस्ट पदाधिकारी चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा से भी विस्तृत पूछताछ की गई। जांच एजेंसियां दान की पूरी प्रक्रिया और जिम्मेदारियों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
किन तीन पहलुओं पर SIT का फोकस
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान SIT ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जानकारी जुटाई—
- श्रद्धालुओं से मिलने वाले नकद और अन्य चढ़ावे की प्राप्ति और रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया
- दान की गिनती, सुरक्षित रखरखाव (Custody) और निगरानी व्यवस्था
- चढ़ावे को बैंक खातों में जमा करने की प्रक्रिया, जिम्मेदार अधिकारी और निगरानी तंत्र
जांच एजेंसी इन तीनों चरणों में किसी संभावित अनियमितता या सुरक्षा चूक की पड़ताल कर रही है।
चंपत राय ने क्या कहा
रिपोर्टों के मुताबिक पूछताछ के दौरान चंपत राय ने चोरी में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने जांच एजेंसी से कहा कि शिकायत सामने आने के बाद कार्रवाई की गई और आरोपियों की गिरफ्तारी भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा थी। अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान हुई बातचीत का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
पहले ही हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने का भी दावा किया गया है। इससे पहले चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दिया था।
जांच को मिला 15 दिन का अतिरिक्त समय
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए SIT को 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया है। इसी अवधि में जांच टीम से विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है।